हाई कोर्ट की फटकार का असर! नागपुर में दिव्यांगों के लिए बस शेल्टरों पर रैम्प बनाने का काम शुरू

Nagpur High Court: नागपुर में बस शेल्टर पर दिव्यांगों के लिए रैम्प नहीं होने पर HC ने परिवहन विभाग को फटकार लगाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके बाद रैम्प निर्माण प्रक्रिया शुरू हो गई है।
Impact of the High Court's reprimand! Work begins on constructing ramps at bus shelters for the differently-abled in Nagpur.
नागपुर हाई कोर्ट, बस शेल्टर, दिव्यांग रैम्प, (फोटो: नवभारत फाइल फोटो)
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Nagpur High Court Bus Shelter: नागपुर महानगरपालिका द्वारा दी जाने वाली मूलभूत सेवा और सुविधाओं की विफलताओं को लेकर कई बार हाई कोर्ट की ओर से दिशानिर्देश जारी किए गए, यहां तक कि कई मामलों में हाई कोर्ट की दखलअंदाजी के चलते ही सेवा-सुविधाएं चाक-चौबंद हो पाई है।

इसी श्रृंखला में हाल ही में हाई कोर्ट की ओर से बस शेल्टर पर विकलांगों के लिए रैम्प नहीं होने का मामला उजागर होते ही मनपा के परिवहन विभाग को फटकार लगाई गई। न केवल फटकार लगाई गई बल्कि परिवहन विभाग के उपायुक्त पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका गया।

हाई कोर्ट के पड़े इस इंटर का ही परिणाम यह रहा कि अब परिवहन विभाग की ओर से बस शेल्टर पर रैम्प बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उल्लेखनीय है कि बस शेल्टर का टेंडर पाने वाली कंपनी साईन पोस्ट को ही इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

बस शेल्टर और आधुनिक सुविधाओं का अधूरा वादा

सूत्रों के अनुसार बस शेल्टर के लिए दिए गए टेंडर और मनपा के साथ हुए एग्रीमेंट के अनुसार कंपनी की ओर से बस शेल्टर में आधुनिक सुविधा भी दी जानी थी जिसमें संबंधित रूट के बस शेल्टर पर कितने बजे कौनसी बस आएगी, इस संदर्भ में इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड भी लगाया जाना था। इसके अलावा यात्रियों को सुविधाएं भी प्रदान की जानी थी।

किंतु आलम यह है कि किसी भी बस शेल्टर पर न तो इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड लगाया गया, न ही यात्रियों की सुविधा के लिए कोई उपाय किए गए। जानकारों की मानें तो इस कंपनी के साथ किए गए एग्रीमेंट में कौनसी शर्तें शामिल थीं इसकी जानकारी तक अधिकारी और पदाधिकारियों को नहीं है।

बस शेल्टर से कितनी हुई आय?

परिवहन विभाग में अधिकारियों की बड़ी फौज तैनात है जहां अनुभव के नाम पर कई सेवानिवृत्त अधिकारियों को भारी भरकम वेतन पर रखा गया है किंतु उजागर हो रही जानकारी पर विश्वास किया जाए तो बस शेल्टर पर कंपनी द्वारा होने वाले विज्ञापनों से मनपा को अब तक कितनी आय हुई है इसकी जानकारी अधिकारियों को नहीं है।

बताया जाता है कि बस शेल्टर पर किए जाने वाले विज्ञापनों के आधार पर कंपनी की ओर से मनपा को प्रति शेल्टर कुछ राशि का भुगतान करना था। चूंकि एग्रीमेंट के अनुसार अभी केवल कुछ माह का समय बचा है। अतः कंपनी से प्राप्त होने वाली राशि को लेकर परिवहन विभाग में अधिकारियों को सांप सूंघने लगा है।

सोता रहा परिवहन विभाग का पूरा महकमा

मनपा के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद आनन-फानन में बस शेल्टर पर रैम्प की सुविधा प्रदान करने के लिए सर्वे शुरू किया गया था, साथ ही अब इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के पूर्व जवाब दायर करने के लिए रैम्प का काम भी शुरू कर दिया गया।

हालांकि अब तक कितने रैम्प तैयार किए गए इसका खुलासा तो नहीं किया गया किंतु सिटी में स्थित 250 बस शेल्टर पर इस तरह के रैम्प तैयार किए जाने है। विभाग की जानकारी के अनुसार सिटी में कुल 250 बस शेल्टर तैयार किए गए हैं। जहां बसों का इंतजार करने के लिए बैठक व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा 1,600 बस स्टॉपेज हैं जहां यात्रियों के लिए बसें रोकी जाती हैं।

जानकारों की मानें तो साइन पोस्ट नामक कंपनी को इसका टेंडर प्रदान करते समय ही एग्रीमेट में इस तरह के रैम्प तैयार करने की शर्त रखी गई थी। अब वर्ष 2027 में कंपनी का एग्रीमेंट खत्म होने जा रहा है किंतु अब तक एक भी रैम्प तैयार नहीं किया गया। यदि हाई कोर्ट की और से आदेश नहीं होते तो कंपनी बिना रैम्प तैयार किए काम खत्म कर देती जिसके बाद मनपा को इसका वित्तीय बोझ उठाना पड़ता।

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