नागपुर की 'ग्रीन नेट' योजना विवादों में, गर्मी से राहत या नई मुसीबत? मिस्ट स्प्रिंकलर सिस्टम पर उठे सवाल

Nagpur Green Net Scheme: नागपुर में गर्मी से राहत के लिए शुरू की गई ग्रीन नेट योजना विवादों में है। घटिया सामग्री व मिस्ट स्प्रिंकलर सिस्टम के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर जांच के आदेश दिए गए हैं।
Nagpur's 'Green Net' Scheme Mired in Controversy: Relief from the Heat or a New Trouble? Questions Raised Over Mist Sprinkler System
ग्रीन नेट योजना,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Nagpur Green Net Summer Heat Relief: नागपुर में बढ़ती गर्मी से त्रस्त नागरिकों को राहत देने के लिए महानगर पालिका द्वारा शुरू की गई 'ग्रीन नेट' योजना विवादों में घिर गई है। 65 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना में निकृष्ट दर्जे की सामग्री का उपयोग किए जाने की बात सामने आई है, जिसे लेकर स्थायी समिति की सभापति शिवानी दानी ने जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी दी।

मिस्ट संप्रंकलर सिस्टमः राहत या स्वास्थ्य के लिए खतरा ?:

इस योजना में सीएसआर फंड के माध्यम से ग्रीन नेट के साथ-साथ 'मिस्ट संप्रिंकलर सिस्टम' भी लगाया जा रहा है। यह सिस्टम जमीन से 15 फुट की ऊंचाई पर खंभों के दोनों और 40-40 हाई-प्रेशर नोजल लगाकर तैयार किया गया है। इन्हें 300 लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी से जोड़ा गया है, जिसे दिन में 3 बार भरा जाता है।

प्रशासन का दावा है कि पानी की हल्की फुहारों से तापमान में लगभग 5 डिग्री की कमी आती है। हालांकि, इस व्यवस्था से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं। तेज धूप से अचानक इस मिस्ट सप्रिंकलर की ठंडक में आने और फिर तुरंत कड़ी धूप में वापस जाने के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की प्रबल आशंका है, जिसकी पुष्टि खुद सभापति ने भी की।

आधा सीजन बीतने के बाद लगाई गई खराब नेट

मनपा ने शहर के 20 चौराहों पर ग्रीन नेट लगाने का निर्णय लिया था, जिसके लिए 65 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। वर्तमान में केवल 5 चौराहों पर ग्रीन नेट लगाई गई है, लेकिन इसकी गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। शुक्रवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में यह मुद्दा जोरों पर रहा। सभापति शिवानी दानी ने स्पष्ट किया कि आधी गर्मी बीत जाने के बाद यातायात विभाग ने ये नेट लगाई और सामग्री के निकृष्ट होने के कारण 65 लाख रुपये का पूरा खर्च व्यर्थ जाता दिख रहा है।

बांसों के कारण चौराहों पर लगा जाम

फिलहाल यह सिस्टम टेलीफोन एक्सचेंज और छापरू नगर चौराहे पर लगाया गया है। अगले चरण में इसे शंकर नगर, संविधान और जीपीओ चौराहे सहित कुल 10 चौराहों पर कार्यान्वित करने की योजना है लेकिन ग्रीन नेट का ढांचा तैयार करने के लिए जिन बांसों का उपयोग किया गया है, उनकी वजह से चौराहों पर भारी यातायात जाम की समस्या पैदा हो रही है।

खराब गुणवत्ता की नेट, स्वास्थ्य के प्रति अनदेखी, देर से किया गया काम और ट्रैफिक जाम जैसी भारी अव्यवस्थाओं के कारण मनपा के नियोजन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सभापति ने आश्वासन दिया कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और अगले वर्ष से ऐसी स्थिति से बच्चने के लिए जनवरी महीने में ही पूर्व तैयारी शुरू कर दी जाएगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com