

Physiology Professors Post Cut: महाराष्ट्र राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोलॉजी विभाग के प्राध्यापक पदों में कटौती के फैसले को लेकर महाराष्ट्र राज्य वैद्यकीय अध्यापक संगठन ने विरोध जताया है।
वैद्यकीय शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के न्यूनतम मानकों के आधार पर पुराने आकृतिबंध के 227 पदों को घटाकर 193 करने का निर्णय लिया है। यानी विभाग में 34 पद कम होंगे और कुल मनुष्यबल में करीब 15 फीसदी की कमी आएगी।
फिलहाल इस मामले में कोर्ट ने स्थगनादेश दिया है। पुराने आकृतिबंध में फिजियोलॉजी विभाग में 39 प्राध्यापक, 72 सहयोगी प्राध्यापक और 116 सहायक प्राध्यापक, यानी कुल 227 पद मंजूर थे।
प्रस्तावित नए आकृतिबंध में 38 प्राध्यापक, 58 सहयोगी प्राध्यापक और 97 सहायक प्राध्यापक रहेंगे। इसमें प्राध्यापकों के 1, सहयोगी प्राध्यापकों के 14 और सहायक प्राध्यापकों के 19 पद कम किए जा रहे हैं।
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 227 पदों में से 34 पदों की कटौती का मतलब है कि विभाग के हर 7 स्वीकृत पदों में लगभग 1 पद कम हो जाएगा। सबसे ज्यादा असर सहायक प्राध्यापक स्तर पर दिखाई देता है। उनके 116 पद घटकर 97 रह जाएंगे।
यानी 19 पद या करीब 16.4 फीसदी की कमी होगी। सहयोगी प्राध्यापक के 72 पदों में से 14 पद कम होंगे, जो करीब 19.4 फीसदी की कटौती है। प्राध्यापक के 39 पदों में एक पद कम किया जा रहा है।
संगठन का कहना है कि पुराने और बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल एमबीबीएस विद्यार्थियों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। पीजी, नर्सिंग, पैरामेडिकल और अन्य स्वास्थ्य पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ शोध, प्रशासनिक कार्य और अस्पताल से जुड़े शैक्षणिक दायित्व भी शिक्षकों को निभाने पड़ते हैं।
कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में ओपीडी, आपातकालीन सेवाएं, जांच और बेड ऑक्यूपेंसी कई बार एनएमसी के न्यूनतम मानकों से अधिक होती है। ऐसे में केवल न्यूनतम मानकों के आधार पर पद तय करने के बजाय प्रत्येक कॉलेज का वास्तविक वर्कलोड, विद्यार्थियों की संख्या, बेड क्षमता, मरीजों का दबाव, विभागीय सेवाएं और शोध कार्य भी पद निर्धारण का आधार होना चाहिए।
सरकार को प्रत्येक मेडिकल कॉलेंज का कॉलेजवार वास्तविक वर्कलोड, विद्यार्थियों की संख्या और अस्पताल की सेवाओं का अध्ययन करना चाहिए। प्राध्यापक पढ़ाने के साथ मरीजों के उपचार, क्लिनिकल प्रशिक्षण, शोध और प्रशासनिक कार्य से भी जुड़े है। इसलिए पद कम करने से पहले वास्तविक जरूरत का आकलन जरूरी है।
- डॉ.समीर गोलावार, अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य वैद्यकीय अध्यापक संगठन