

Nagpur Chlorine Gas Leak Alert: नागपुर जिले में गोधनी जल शुद्धिकरण केंद्र में रविवार की मध्य रात्रि हुई क्लोरीन गैस रिसाव के कारण भले ही कोई बड़ी हानि न हुई हो लेकिन यह केंद्र केवल 6 एमएलडी का होने के कारण अनहोनी टल गई। चूंकि महानगरपालिका की ओर से गोरेवाड़ा जल शुद्धिकरण केंद्र और बोखारा का शुद्धिकरण केंद्र संचालित होता है और यह शहर की सीमा से सटा हुआ है।
ऐसे में महानगरपालिका के लिए अलर्ट का अलार्म दे गया है। विशेषतः गोरेवाड़ा जल शुद्धिकरण केंद्र से आधे शहर को जलापूर्ति होती है जिससे यहां पर क्लोरीनेशन प्लांट का अधिक उपयोग होता है। इसी तरह से यहां पर 900 किलोग्राम के कई सिलेंडर भी होते हैं। हालांकि इन जल शुद्धिकरण केंद्रों पर विशेषज्ञों और हर समय तकनीकी टीम तैनात होने का दावा तो किया जा रहा है, घटना ने पूरे प्रशासन को अलर्ट मोड पर ला दिया है।
जल शुद्धिकरण प्रक्रिया में क्लोरीन का इस्तेमाल पानी को कीटाणुरहित करने के लिए किया जाता है। हालांकि क्लोरीन गैस अत्यंत संवेदनशील और जहरीली होती है। इसके रिसाव की स्थिति में कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास रहने वाली आबादी के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
ऐसे में जल शुद्धिकरण केंद्रों पर क्लोरीन के भंडार, सिलेंडर/कंटेनर की निगरानी, गैस डिटेक्शन सिस्टम और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। महानगरपालिका द्वारा संचालित गोरेवाड़ा जल शुद्धिकरण केंद्र शहर की जलापूर्ति व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। दोनों केंद्र शहर की सीमा से सटे क्षेत्रों में स्थित होने के कारण यहां किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी या क्लोरीन रिसाव की स्थिति में आसपास की आबादी प्रभावित हो सकती है।
गोधनी की घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जल शुद्धिकरण केंद्रों के आसपास रहने वाले नागरिकों के लिए आपातकालीन सुरक्षा योजना कितनी प्रभावी है।
क्लोरीन रिसाव जैसी घटना में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते है। इसलिए आसपास के नागरिकों को भी आपात स्थिति में क्या करना है और किस दिशा में सुरक्षित स्थान पर जाना है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
गोधनी की घटना को केवल एक स्थानीय तकनीकी घटना के रूप में देखने के बजाय मनपा के जलापूर्ति विभाग के लिए चेतावनी का संकेत माना जाना चाहिए। बौखारा और गोरेवाड़ा जल शुद्धिकरण केंद्रों की सुरक्षा-व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर संभावित खामियों को घटना से पहले ही दूर करना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार क्लोरीन से जुड़े संयंत्रों में नियमित निरीक्षण, उपकरणों का रखरखाव, प्रशिक्षित स्टाफ, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली किसी भी बड़े हादसे को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, इसलिए गोधनी की घटना के बाद बोखारा और गोरेवाड़ा केंद्रों पर' सुरक्षा पहले' के आधार पर विशेष निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
गोधनी में हुई घटना के बाद इन केंद्रों पर क्लोरीन सुरक्षा-व्यवस्था का तत्काल ऑडिट किए जाने की जरूरत सामने आई है। विशेष रूप से क्लोरीन गैस की पाइपलाइन, वॉल्व, सिलेंडर/स्टोरेज व्यवस्था, लीकेज डिटेक्टर, वेंटिलेशन सिस्टम और आपातकालीन शटडाउन व्यवस्था की जांच जरूरी है। जल शुद्धिकरण केंद्रों में क्लोरीन रिसाव की स्थिति से निपटने के लिए केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है।
कर्मचारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण देने और मॉक ड्रिल आयोजित करने की भी आवश्यकता है। रिसाव होने पर किस क्षेत्र को खाली कराया जाएगा, कर्मचारियों को कौनसे सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होंगे, आसपास की बस्तियों को किस माध्यम से सूचना दी जाएगी और आपातकालीन स्थिति में कौनसा विभाग कितनी तेजी से मौके पर पहुंचेगा, इसकी स्पष्ट कार्ययोजना होना जरूरी है।