

Maharashtra Government Free Treatment: नागपुर के गोधनी जल शोधन संयंत्र में क्लोरीन गैस रिसाव की घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने प्रभावित मरीजों के इलाज का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया है। 24 अगस्त की तड़के महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के जल शोधन केंद्र में रखे क्लोरीन गैस के दो सिलेंडरों में से एक से रिसाव हुआ था। गैस की चपेट में आने के बाद करीब 59 लोगों को उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
हादसे के बाद मरीजों के इलाज और अस्पतालों के बिलों के भुगतान को लेकर एक समान प्रक्रिया तय करने के लिए जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद ने संबंधित निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में मरीजों को इलाज के दौरान किसी तरह की आर्थिक परेशानी न हो, इसे लेकर जरूरी निर्देश दिए गए।
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जिलाधिकारी को तत्काल आवश्यक कदम उठाने और प्रभावित लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद प्रशासन ने निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के उपचार की व्यवस्था की। फिलहाल प्रभावित मरीज मैक्स अस्पताल, स्पर्श अस्पताल, विवेका अस्पताल, सिनर्जी अस्पताल, ऑलराइट अस्पताल और किंग्सवे अस्पताल समेत अन्य निजी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रभावित मरीजों के इलाज, जांच, दवाइयों और अन्य जरूरी चिकित्सा सेवाओं का खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इसलिए मरीजों या उनके परिजनों से इलाज के नाम पर किसी भी तरह की राशि नहीं वसूली जाए।
अस्पतालों को मरीजों के उपचार से जुड़े खर्च का रिकॉर्ड और बिल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि सरकार की ओर से भुगतान की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए।
गोधनी के जल शोधन संयंत्र में गैस रिसाव की घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हुई थी। इसके बाद प्रभावित लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
अब प्रशासन का फोकस मरीजों के बेहतर इलाज के साथ-साथ अस्पतालों के भुगतान की प्रक्रिया को सुचारु रखने पर है। सरकार के इस फैसले से हादसे में प्रभावित मरीजों और उनके परिवारों को इलाज के खर्च की चिंता से राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल करीब 59 प्रभावित लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार जारी है। प्रशासन की निगरानी में उनके स्वास्थ्य और इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है।