नागपुर में कचरा संकट गहराया, कई इलाकों में बढ़ी नागरिकों की परेशानी; कांग्रेस ने प्रशासन को घेरा

Nagpur Garbage Collection: एजी एन्वायरो कंपनी के ठेका कर्मचारियों की कामबंद हड़ताल से नागपुर के कई इलाकों में कचरा संकलन प्रभावित हुआ है। सड़कों पर कचरे के ढेर लगने से नागरिकों की परेशानी बढ़ गई है।
Garbage crisis deepens in Nagpur, residents in several areas face increased hardship; Congress targets the administration.
नागपुर मनपा, कचरा संकलन, सफाई व्यवस्था, (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
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Nagpur Municipal Corporation: नागपुर शहर में स्वच्छता व्यवस्था एक बार फिर गंभीर संकट का सामना कर रही है। एजी एन्वायरो कंपनी के ठेका कर्मचारियों द्वारा शुरू किए गए कामबंद आंदोलन के कारण शहर के लगभग आधे हिस्से में कचरा संकलन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। कई इलाकों में नियमित रूप से कचरा नहीं उठाए जाने से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर जमा होने लगे हैं, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नगरसेवक तथा नागपुर महानगरपालिका की स्थायी समिति के सदस्य अभिजीत झा ने प्रशासन और सत्ताधारी पक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शहर की बिगड़ती स्वच्छता व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से कंपनी के कामकाज को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

झा के अनुसार, शहर के जीएसआई कार्यालय क्षेत्र, फुटाला, भरतनगर, तेलंगखेड़ी, सिविल लाइंस सहित अनेक इलाकों में कचरे के ढेर जमा हो गए हैं। नियमित कचरा संकलन नहीं होने से नागरिकों की शिकायतों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई स्थानों पर बदबू और गंदगी के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की भी आशंका सताने लगी है।

एजी एन्वायरो की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल, जवाबदेही तय करने की मांग

उन्होंने बताया कि एजी एन्वायरो कंपनी को नागपुर महानगरपालिका के झोन क्रमांक 1 से 5 तक कचरा संकलन और परिवहन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, कंपनी के कामकाज को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। नगरसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने कई बार अनियमित कचरा संकलन, पर्याप्त कर्मचारियों की कमी, करार की शर्तों के कथित उल्लंघन तथा सफाई व्यवस्था में गंभीर खामियों की शिकायत की है।

अभिजीत झा ने आरोप लगाया कि कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर कई बार महानगरपालिका की बैठकों और सभागृह में चर्चा हुई, लेकिन प्रशासन ने कभी भी कठोर कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि यदि समय रहते कंपनी की जवाबदेही तय की गई होती, तो आज शहर को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे को विधानसभा स्तर तक उठाया जा चुका है और विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों ने भी कंपनी के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका।

कचरा संकलन ठप होने से बढ़ी परेशानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर खतरा

वर्तमान स्थिति में सबसे अधिक परेशानी आम नागरिकों को उठानी पड़ रही है। कई कॉलोनियों और आवासीय क्षेत्रों में कई दिनों से कचरा नहीं उठाया गया है, जिससे स्वच्छता अभियान और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

नगरसेवक ने प्रशासन से मांग की है कि हड़ताल का तत्काल समाधान निकालकर कचरा संकलन व्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जाए। साथ ही कंपनी के कामकाज की व्यापक समीक्षा कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कचरा जमा रहने से मच्छरों और अन्य रोग फैलाने वाले कीटों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए स्वच्छता व्यवस्था को जल्द बहाल करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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