‘फ्रैक्टल डायनामिक्स’ से उत्पादन की सुरक्षा मजबूत, विवि के छात्रों के संशोधन को वैश्विक मान्यता

Fractal Dynamics: नागपुर विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा विकसित ‘फ्रैक्टल डायनामिक्स’ आधारित 3-डी प्रिंटिंग तकनीक को अंतरराष्ट्रीय पेटेंट मिला है, जिससे उत्पादन सुरक्षा और डुप्लीकेशन रोकने में नई दिशा
Fractal Dynamics
Anti Duplication Manufacturing (सोर्सः AI GENERATED)
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Nagpur University Research: उत्पादन प्रक्रियाओं की सुरक्षा को अधिक मजबूत बनाने वाला एक महत्वपूर्ण संशोधन राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा किया गया है। ‘फ्रैक्टल डायनामिक्स’ प्रणाली के उपयोग से 3-डी प्रिंटिंग क्षेत्र में किए गए इस नवीन संशोधन को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। इस डिजाइन को पेटेंट प्राप्त होने से विश्वविद्यालय का गौरव वैश्विक स्तर पर बढ़ा है। यह प्रणाली उत्पादों की नकल (डुप्लीकेशन) और नकली निर्माण को रोकने में प्रभावी सिद्ध होगी।

विश्वविद्यालय के स्वायत्त शैक्षणिक विभाग सहित संलग्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस संशोधन में सहभागिता की है। इसमें डॉ. नवल साबे, डॉ. कैलास बोरगडे, विलास हिरनवाले, शुभम घुमडे, डॉ. विजय राघोर्ते और यजुर्वेद सेलोकार का समावेश है। इस संशोधन का नाम ‘इंटेलिजेंट एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग अपरेटस यूजिंग नॉन-लीनियर फ्रैक्टल डायनामिक्स’ रखा गया है।

बुद्धिमान उत्पादन तंत्र प्रस्तुत

इस शोध को यूनाइटेड किंगडम के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस द्वारा अधिकृत डिजाइन संरक्षण प्रदान किया गया है। इसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग अर्थात 3-डी प्रिंटिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह प्रणाली नॉन-लीनियर फ्रैक्टल डायनामिक्स पर आधारित एक बुद्धिमान उत्पादन तंत्र प्रस्तुत करती है। इसमें मैन्डेलब्रॉट और जूलिया सेट्स जैसी जटिल गणितीय अवधारणाओं का उपयोग किया गया है। उत्पादन प्रक्रिया के दौरान सूक्ष्म संरचनाओं (माइक्रो-स्ट्रक्चर्स) में आवश्यकतानुसार परिवर्तन संभव होने से संरचनात्मक ऑप्टिमाइजेशन वास्तविक समय में किया जा सकता है।

एआई आधारित उन्नत प्रणाली

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऑप्टिमाइजेशन, डायनामिक टूल-पाथ मॉड्यूलेशन और फ्रैक्टल-आधारित एन्क्रिप्शन के समावेश से यह प्रणाली अत्यंत सटीक, सुरक्षित और डुप्लीकेशन-रोधी बनती है। इस संशोधन में भौतिकशास्त्र, गणित, अभियांत्रिकी और जैविक विज्ञान क्षेत्रों के विशेषज्ञों का सहयोग प्राप्त हुआ है।

डॉ. नवल साबे, जो भौतिकशास्त्र विभाग में कार्यरत हैं, ने गणितीय मॉडलिंग और फ्रैक्टल डायनामिक्स के माध्यम से इस संशोधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर, डॉ. राजू हिवसे, विज्ञान विद्याशाखा के अधिष्ठाता डॉ. उमेश पालीकुंडवार तथा भौतिकशास्त्र विभाग प्रमुख डॉ. संजय ढोबले ने शोध दल का अभिनंदन किया है।

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