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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ठेंगा! नागपुर में फुटपाथ बने पार्किंग व गोदाम, पैदल चलना हुआ दुभर

Nagpur Footpath Encroachment: नागपुर में फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण से पैदल यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के डेढ़ महीने बाद भी कार्रवाई प्रभावी नहीं दिख रही।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Aug 05, 2026 | 07:07 AM

नागपुर, फुटपाथ अतिक्रमण, सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो

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Pedestrian Rights Footpath Encroachment: नागपुर शहर में जिस प्रकार सड़कों का विकास हुआ है उससे भी तेज इनके फुटपाथों पर अतिक्रमण का ‘कोढ़’ अब ‘कैंसर’ का रूप ले चुका है। पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ अब दुकानों, ठेलों, पार्किंग, गोदामों और अस्थायी बाजारों की स्थायी जागीर बन चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट 19 जून को ही कह चुका है कि फुटपाथ पर पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। इस निर्देश के करीब डेढ़ महीना बीतने के बाद शहर में अतिक्रमण के खिलाफ एक्शन ‘ढाक के तीन पात’ ही नजर आ रहा है। यानी अब स्थानीय प्रशासन (मनपा व जिलाधिकारी कार्यालय) सुको को भी ठेंगा दिखाने से नहीं चूक रहा।

फुटपाथ पर व्यापार, सड़क पर पैदल यात्री…

आज शहर के करीब तीन चौथाई फुटपाथों पर अतिक्रमणकारियों कब्जा हो चुका है। कहीं फल मंडी, कहीं सोफा बाजार, कहीं होटल का विस्तार, कहीं रेडीमेड कपड़ों की दुकानें तो कहीं दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री के शोरूम तक फुटपाथ पर फैल चुके हैं। बची हुई जगह पर वाहन पार्क है।

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नतीजा यह कि जिसके लिए फुटपाथ बनाए गए थे वे ही नागरिक अब सड़क पर उतरने को मजबूर है। विडंबना यह है कि हर दिन हजारों लोग इसी अव्यवस्था के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और कार्यालय तक पहुंचते हैं लेकिन प्रशासन की संवेदनाएं शायद किसी और रास्ते से गुजरती है।

स्मार्ट सिटी के दावों के बीच नागपुर के फुटपाथ सबसे बदहाल तस्वीर पेश कर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कें बनाई जाती है, सुंदर टाइल्स बिछाई जाती है लेकिन कुछ ही दिनों में उन पर दुकानें सज जाती हैं। प्रशासन की उपलब्धिया विज्ञापनों में दिखाई देती है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि शहर का पैदल यात्री अपने हिस्से की जगह तलाश रहा है।

बगल में चोर, गांव में ढिंढोरा

मनपा के अतिक्रमण उन्मूलन दस्ते द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है, कैमरे पहुंचते हैं, जेसीबी चलती है, फोटो खिंचती हैं, लिखा-पढ़ी होती है, कागज लाल-नीले होते हैं, फाइले बनती है और अगले ही सप्ताह वही ठेले, वहीं दुकानें, वही कब्जे फिर उसी स्थान पर लौट आते हैं, सबसे हैरानी की बात यह है कि अतिक्रमण उन्मूलन विभाग के दफ्तर और मनपा मुख्यालय के आसपास तक फैले अतिक्रमण पर भी कार्रवाई अक्सर दिखाई नहीं देती। जिलाधिकारी कार्यालय के सामने के हाल इससे भी बुरे हैं जहां फुटपाथ के साथ सड़क पर भी कब्जा कर लिया गया है।

सरकारी दामाद को प्रशासन की मौन सहमति !

आज शहर का शायद ही कोई प्रमुख बाजार बचा हो जहां फुटपाथ अपने मूल स्वरूप में दिखाई देता हो। सीताबर्डी, गांधीबाग, इतवारी, सदर, धरमपेठ, मेडिकल चौक, कॉटन मार्केट, अजनी, जरीपटका, मानेवाड़ा और अन्य व्यस्त इलाकों में हालात लगभग एक जैसे हैं।

अतिक्रमण करने वालों का आत्मविश्वास और प्रशासन की निष्क्रयता, दोनों समान गति से बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हाल ये है कि अब सड़कों पर साप्ताहिक बाजारों का कब्जा रहता है। ऐसा नहीं है कि स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है। अब तो शहरवासियों का लगने लगा है कि अतिक्रमण सरकारी दामाद बन चुका है।

यह भी पढ़ें:-Genelia D Souza Birthday: शादी के एक महीने बाद फूट-फूटकर रोई थीं जेनेलिया डिसूजा, वजह जान हंस पड़ेंगे आप

‘धृतराष्ट्र’ की भूमिका

महाभारत में घृतराष्ट्र की सबसे बड़ी आलोचना इस बात को लेकर होती है कि भले ही उसे आंखों से अपने दुष्ट पुत्र दुर्योधन की चालाकी दिखाई न देती हो लेकिन जानकारी और समझ पूरी थी।

इसे बावजूद अपने पुत्रमोह में धृतराष्ट्र ने कभी दुर्योधन को रोकने का प्रयास नहीं किया। ऐसा ही नजारा शहर में फुटपाथों से सडक तक फैल चुके अतिक्रमण को हो चुका है।

फर्क सिर्फ इतना है कि यहां स्थानीय प्रशासन आंखों वाले घृतराष्ट्र की भूमिका में है जिसे आंखों से सब दिखाई दे रहा है, फिर भी आंखें मूंदकर अतिक्रमण को न देखने की एक्टिंग जारी है।

Footpath encroachment supreme court order pedestrian rights nagpur

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Published On: Aug 05, 2026 | 07:07 AM

Topics:  

  • Illegal Encroachment
  • Infrastructure
  • Maharashtra News
  • Nagpur News
  • NMC
  • Supreme Court

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