नागपुर महानगरपालिका नियुक्ति को लेकर मचा बवाल (सौ.सोशल मीडिया)
नागपुर: नागपुर महानगरपालिका में नियुक्ति के लिए घोषित सफाईकर्मियों के वारिसों की सूची को लेकर हड़कंप मच गया है। आरोप है कि सूची में कई अनियमितताएं हैं और सूची दुर्भावनापूर्ण इरादे से जारी की गई है। नेताओं के करीबी या अपने परिचित लोगों को जगह देने का भी आरोप है। साथ ही 6 अगस्त को जारी 329 व्यक्तियों की सूची में कई पात्र उत्तराधिकारियों को अपात्र घोषित कर दिया गया या उनकी उपेक्षा की गई। कई कर्मचारियों के वारिसों को सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद सूची में शामिल नहीं किया गया।
गौर करने वाली बात यह है कि प्लेसमेंट के लिए स्पॉट इंस्पेक्शन आवश्यक है। प्रशासन ने इसका निरीक्षण भी नहीं किया। मौके पर निरीक्षण न होने के कारण कई लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए। आरोप है कि महज 15 दिन बैठक कर सूची को अंतिम रूप दे दिया गया। नगर निगम की ओर से जारी सूची को लेकर कई परिवारों ने प्रशासन से आपत्ति जताई है। ऐसे में नियुक्ति सूची में गड़बड़ी की आशंका है।
लाड पागे समिति की अनुशंसा के अनुसार सफाई कर्मियों के उत्तराधिकारियों को मनपा में नौकरी देने का नियम है। इसके तहत मनपा के कई सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने अपने उत्तराधिकारियों के लिए आवेदन किया था। हाल ही में औरंगाबाद पीठ के एक फैसले के बाद अन्य अनुसूचित जातियों को भी सूची में शामिल किया गया है। ऐसे में अनेक लोगों को इसका पात्र होना चाहिए था। प्रशासन ने कई लोगों को नजरअंदाज करते हुए इस सूची की घोषणा की। इस संबंध में कई मामले सामने आ चुके हैं।
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नागपुर महानगरपालिका से वर्ष 2021 में रिटायर हुए राजकुमार वंजारी ने अपनी बेटी के लिए आवेदन किया था। सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए। 15 अगस्त को उनकी बेटी को कार्यालय बुलाया गया था। जांच की गई, दस्तावेज भी वेरीफाई किए गए लेकिन जब सूची जारी हुई तो उसमें वंजारी की बेटी का नाम नहीं था। इसी तरह सिद्धार्थ धनविजय वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनसे न तो पूछताछ की गई और न ही पूछताछ के लिए बुलाया गया। इसके अलावा कई वर्षों पहले रिटायर हुए नाना अडिकाणे, अनिरुद्ध भालेकर, चक्रधर वानखेड़े समेत 50 से ज्यादा मामले सामने आए हैं लेकिन उनके वारिसों के नाम सूची में नहीं थे। उनके बाद रिटायर होने वालों के वारिसों के नाम सूची में आए। ऐसे में जो नाम बचे हैं उन्हें शामिल कर दोबारा सूची प्रकाशित करने की मांग की जा रही है।
24 जून 2024 को हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने कहा कि इसमें अन्य अनुसूचित जाति और जनजाति को भी शामिल किया जाए। इसके बाद मनपा प्रशासन ने 40 दिनों तक कोई प्रतिक्रिया नहीं की। इसके बाद केवल 3 दिन में मीटिंग कर पूरी लिस्ट फाइनल कर ली गई जो लोग पहले रिटायर हो गए उनके नाम इस सूची में नहीं थे। जिनका नाम बाद में आया, उन्हें सीटें आवंटित कर दी गईं। बीते 2 वर्षों से आवेदकों की जांच नहीं की गई है। इसलिए नाम नहीं आये यदि स्पॉट निरीक्षण किया गया होता तो पात्र लोग सूची में होते। यह प्रशासन की जिम्मेदारी थी। अयोग्यता का कारण नहीं बताया गया। इस सूची में नेताओं के करीबी रिश्तेदारों पर पक्षपात का भी आरोप है। ऐसे में सूची को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
मनपा के घनकचरा व्यवस्थापन विभाग के उपायुक्त डॉ. गजेंद्र महल्ले ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण लंबित हैं। उम्मीदवारों के आवेदन पूर्व निर्धारित नियमानुसार लिये गये। बाद में कोर्ट का फैसला आया और अन्य जातियों को समायोजित कर दिया गया। यदि उम्मीदवार पात्र हैं और उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज हैं तो उठाई गई आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।