प्रशासन का पावर सेंटर बना कीचड़ का मैदान! नागपुर संभागीय आयुक्त परिसर में बदइंतजामी पर सवाल

Nagpur Civic Issue: नागपुर के संभागीय आयुक्त परिसर में एक महीने से चल रहे सीवरलाइन कार्य ने पूरे परिसर को कीचड़ में बदल दिया है। प्रशासनिक मुख्यालय में बदइंतजामी पर सवाल उठ रहे हैं।
A muddy field has become the administration's power center! Conditions at the Nagpur Divisional Commissioner's complex have been in a sorry state for the past month.
नागपुर, संभागीय आयुक्त परिसर,(साेर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Divisional Commissioner Office: नागपुर जिस सरकारी परिसर से पूरे संभाग के प्रशासन का संचालन होता है वही आज बदइंतजामी का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। संभागीय आयुक्त परिसर में पिछले एक महीने से चल रहे सीवरलाइन के काम ने इसे 'दफ्तर' कम और 'कीचड़ का मैदान' अधिक बना दिया है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि संभाग के सबसे बड़े अधिकारी इसी परिसर में बैठते हैं लेकिन वे भी इस विकट स्थिति को मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं।

अतिक्रमण का बोलबाला

एक ओर खुदाई का तांडव है तो दूसरी ओर पार्किंग स्थल पर अवैध होटलों और सड़क किनारे दुकानों ने कब्जा जमा रखा है। नागरिक एक तरफ कीचड़ में फंस रहे हैं तो दूसरी ओर अवैध अतिक्रमण से जूझ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी दफ्तरों के सामने ही ऐसी अराजक स्थिति पैदा करना प्रशासन की कार्यप्रणाली का हिस्सा बन गया है। जब आम नागरिक किसी कार्य के लिए दफ्तर पहुंचता है तो उसे कीचड़ और फिसलन से होकर गुजरना पड़ता है।

कीचड़ में फंसी प्रशासनिक व्यवस्था

इस परिसर में सिंचाई विभाग, रजिस्ट्री ऑफिस, मनरेगा आयुक्त, एफडीए, सीआईडी, पीडब्ल्यूडी और टेक्सटाइल कमिश्नर जैसे कई महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर स्थित है। साथ ही जिला परिषद जाने के लिए भी नागरिक इसी मार्ग का उपयोग करते हैं, एक महीने से चल रही खुदाई और उसके बाद हुई बारिश ने पूरे परिसर को 'कीचड़ कीचड़ कर दिया है।

अवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दफ्तरों के अंदर टाइल्स पर कीचड़ के कारण लोग फिसलकर गिर रहे है। अब तक कई कर्मचारियों के घायल होने की सूचना है। सिंचाई विभाग के सामने की स्थिति सबसे दयनीय है। यदि एक और जोरदार बारिश हुई तो इन कार्यालयों तक पैदल पहुंचना भी नामुमकिन हो जाएगा।

प्रशासनिक भवन जहां से शहर और संभाग की व्यवस्था तय होती है, आज वहीं सुरक्षा और साफ-सफाई के बुनियादी मानकों का पालन नहीं हो पा रहा है। क्या जिला प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है।

नागरिकों ने मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, तत्काल अस्थायी रास्तों का निर्माण किया जाए और परिसर में फैले अवैध अतिक्रमण को हटाया जाए, जब तक अधिकारी अपने ही दफ्तर के बाहर की इस' नरक' जैसी स्थिति को ठीक नहीं कर सकते तब तक वे शहर की समस्याओं को सुलझाने का नैतिक अधिकार कैसे रखते हैं।

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