नागपुर विदर्भ-मराठवाड़ा का सिंचाई बैकलॉग जून 2027 तक होगा पूरी तरह खत्म; विधानसभा में देवेंद्र फडणवीस का दावा
Nagpur Devendra Fadnavis: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि 2011 तक का सिंचाई वित्तीय बैकलॉग समाप्त हो चुका है। विदर्भ का 94% और मराठवाड़ा का 99% भौतिक बैकलॉग भी पूरा कर लिया गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, सिंचाई बैकलॉग, प्रतीकात्मक तस्वीर,(साेर्स: एआई फोटो)
Nagpur Devendra Fadnavis Irrigation Backlog: नागपुर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि राज्य के सभी जिलों में वर्ष 2011 तक का सिंचाई संबंधी वित्तीय बैकलॉग पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वहीं विदर्भ का 94 प्रतिशत और मराठवाड़ा का 99 प्रतिशत भौतिक सिंचाई वैकलॉग भी दूर कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के अंत तक विदर्भ में 7,84,720 हेक्टेयर के कुल सिंचाई बैकलॉग में से 7,41,185 हेक्टेयर अर्थात 94 प्रतिशत बैकलॉग समाप्त कर दिया गया है।
फिलहाल अकोला और बुलढाना जिलों में ही क्रमशः 14,530 और 29,005 हेक्टेयर का बैकलॉग शेष है। उन्होंने आश्वत किया कि विदर्भ और मराठवाड़ा का शेष बैकलॉग जून 2027 तक पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने विधानसभा में अपने लिखित उत्तर में यह दावा किया।
97 लाख से अधिक रोजगार
उद्योग, ऊर्जा एवं श्रम विभाग की जानकारी के अनुसार 16 सितंबर 2019 को सामूहिक प्रोत्साहन योजना लागू की गई थी। इसके तहत जुलाई 2020 से दिसंबर 2025 के बीच विदर्भ में 13,42,798 तथा मराठवाड़ा में 8,12,382 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) स्थापित किए गए इनके माध्यम से विदर्भ में 57.88 लाख और मराठवाड़ा में 39.13 लाख, यानी कुल लगभग 97 लाख रोजगार निर्माण हुए है।
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अमृतकाल सड़क विकास योजना तथा विकसित महाराष्ट्र-2029 के तहत सड़क विकास के लक्ष्य तय किए गए हैं, जिससे प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान छत्रपति संभाजीनगर संभाग में रोजगार मेलों के माध्यम से 8,617 उम्मीदवारों का चयन किया गया। अमरावती और नागपुर संभाग में रोजगार मेलों में क्रमशः 4,728 तथा 7,834 लोगों का चयन किया गया।
बता दें कि विदर्भवादी हमेशा विदर्भ को जानबूझकर पिछड़ा रखने के आरोप लगाते रहे हैं। सिंचाई के साथ ही सड़कों, रोजगार, उद्योग, स्वास्थ व शिक्षा के क्षेत्रों का बैकलॉग भी होने का दावा विदर्भवादी करते रहे हैं। बैकलॉग व वैधानिका विकास मंडलों के पुनर्गठन को लेकर विधायक सुलभा खोडके, प्रवीण दटके, प्रताप अडसड, मोहन मते, विकास ठाकरे, विजय वडेट्टीवार, संजय मेश्राम, नाना पटोले, सुधीर मुनगंटीवार सहित अन्य सदस्यों ने प्रश्न उठाया था। इसके जवाब में सीएम ने यह जानकारी दी।
निर्धारित फॉर्मूले से ही निधि वितरण
सीएम ने बताया कि विदर्भ, मराठवाड़ा और शेष महाराष्ट्र विकास मंडली का कार्यकाल 30 अप्रैल 2020 को समाप्त हो गया था। बावजूद इसके राज्यपाल द्वारा निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार विदर्भ को 23.03 प्रतिशत, मराठवाडा को 18.75 प्रतिशत और शेष महाराष्ट्र को 58.23 प्रतिशत के अनुपात में निधि का आवंटन किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि अकोला, अमरावती, बुलढाना और वाशिम जिलों में वर्ष 2023 से अब तक 2 लाख से अधिक नए उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है, उन्होंने बताया कि फिलहाल वैधानिक विकास मंडल अस्तित्व में नहीं हैं, लेकिन उनके कार्यालय पूरी तरह बंद नहीं किए गए है क्योंकि भविष्य में इन्हें दोबारा शुरू करने और पदों पर नियुक्ति करने में काफी समय लगेगा।
10 अप्रैल को तीनों मंडलों के लिए कुल 51 पदों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिनमें से 18 पद भरे जा चुके हैं, जबकि 33 पद अभी भी रिक्त हैं। विदर्भ के लिए डॉ. विजय भाकरे और मराठवाड़ा के लिए अनिल रामीड को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। पिछले 3 वर्षों में इन मंडलों के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों पर 3.05 करोड़ रुपये तथा वेतनेतर मदों पर लगभग 26 लाख रुपये खर्च हुए।
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केंद्र को भेजे 5 पत्र
फडणवीस ने बताया कि विदर्भ, मराठवाड़ा और शेष महाराष्ट्र विकास मंडलों के पुनर्गठन के लिए राज्यपाल ने 28 अक्टूबर 2022, 12 दिसंबर 2022, 9 अप्रैल 2023, 22 अगस्त 2024 तथा 10 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार को 5 अलग-अलग पत्र भेजें, इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय से आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध करने के लिए राज्यपाल के सचिव ने 6 मई को भी पत्र भेजा।
