नागपुर. मेडिकल के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेस में एडमिशन के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा नीट पीजी के बाद उसकी काउंसलिंग आयोजित ना होने का खामियाजा सीनियर डॉक्टरों को भुगतना पड़ रहा है. परीक्षा हुए करीब 3 महीने से ज्यादा का समय हो गया है. लेकिन वर्तमान में उसकी काउंसलिंग कब होगी? इसकी ठोस जानकारी किसी के पास नहीं है. काउंसलिंग ना होने से अस्पतालों में सीनियर डॉक्टर ही लगातार ड्यूटी दे रहे हैं.
इससे उनके सामने डिप्रेशन की समस्या उत्पन्न होने लगी है. काउंसलिंग की मांग के लिए रविवार को मेडिकल और मेयो के डॉक्टरों ने आंदोलन कर सरकार से जल्द से जल्द काउंसलिंग शुरू कराने की मांग की है. जिससे डॉक्टरों की कमी पूरी की जा सके.बता दें कि एमडी/एमएस में प्रवेश के लिए भारत सरकार नीट पीजी की परीक्षा आयोजित करती है. इस साल इस परीक्षा अगस्त में हुई थी. इसी दौरान मराठा आरक्षण के कारण इसकी काउंसलिंग 6 जनवरी 2022 तक टाल दी है. जिससे डॉक्टर्स बेहद परेशान हैं. क्यों कि अस्पतालों मेें मरीजों की संख्या बढ़ने से उन पर काम का दबाव बढ़ रहा है.
एमडी/एमएस कोर्स में तीन साल के लिए छात्र निरंतर तीन साल तक एक ही अस्पताल में स्थाई डॉक्टर के रूप में अपनी सेवा देते हैं. इसके बाद तीसरे वर्ष में उन्हें योग्यता के आधार पर डिग्री दे दी जाती है. उनकी जगह नीट पीजी प्रवेश प्रक्रिया में उत्तीण हुए उनके जूनियर छात्रों को ड्यूटी पर लगाया जाता है. यह सिस्टम निरंतर काम करता है. लेकिन इस साल समय पर काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित ना होने से सिस्टम बिगड़ गया है. इसी को सुधारने के लिए डॉक्टर लगातार मांग कर रहे हैं.
शहर में मेयो और मेडिकल दो बड़े अस्पताल हैं. यहां पूरे विदर्भ के साथ पास के पड़ौसी राज्यों के लोग भी बड़ी संख्या में इलाज कराने के लिए आते हैं. वर्तमान में 100 में से सिर्फ 60 प्रतिशत डॉक्टर ही काम कर रहे हैं. डॉक्टरों की कमी के कारण वर्क लोड निरंतर बना हुआ है. इससे वर्तमान में नियुक्त डॉक्टरों की स्टडी पर भी असर पड़ रहा है. वे अस्पताल प्रबंधन को भी परेशानी बता चुके हैं. सुनवाई ना होने पर उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया.
मार्ड नागपूर के अध्यक्ष डॉ. सजल बंसल के अनुसार मेये और मेडिकल के सभी डॉक्टरों ने काेविड काल में बिना आराम किए अपनी सेवाएं निरंतर दीं. इस समय नागपुर सहित पूरे देश में 40 हजार डॉक्टरों की कमी है. इस कमी को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द नीट पीजी प्रवेश परीक्षा की काउंसलिंग प्रक्रिया का जल्द शुरू होना जरूरी है. इससे जो सिस्टम बिगड़ा हुआ है वो दुरस्त होगा. साथ ही डॉक्टरों पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा.