दावोस निवेश (AI generated image)
Maharashtra Investment News: स्विट्जरलैंड की सुंदर वादियों के बीच बसे दावोस महाराष्ट्र को पिछले कुछ वर्षों से ऊर्जावान कर रहा है। दावोस से राज्य और विदर्भ के लिए खुशियों भरी खबर काफी मिल रही है। 2025 में विदर्भ के हिस्से में 1.58 लाख करोड़ का निवेश आया था जो 2026 में बढ़कर 5.92 लाख करोड़ पहुंच गया। निश्चित रूप से ऐसे निवेश से किसी भी क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपने पूरे दल-बल के साथ वहां से निवेश लाते हैं। लेकिन 2025 में जारी सूची और 2026 में जारी सूची देखने से एक विरोधाभास नजर आ रहा है। जिन कंपनियों से 2025 में करार किया गया था उन्हीं कंपनियों से 2026 में भी करार किया गया है। इससे मन में संदेह उत्पन्न होना लाजमी है। एक नहीं, दो नहीं ऐसे कम से कम 5 बड़े करार दोनों वर्षों में होना दिखाया गया है।
2025 में सरकार ने पावरिंग ऊर्जा, वर्धमान लिथियम, वारी एनर्जी, हजेरो इंडस्ट्रीज और एमएसएन होल्डिंग्स लि. के साथ करार किए थे। ये निवेश लगभग 1 लाख करोड़ के आसपास के थे। इनमें से वारी ने जमीन ले भी ली थी। आश्चर्य की बात यह है कि 2026 में जारी सूची में भी इन कंपनियों का नाम शामिल है।
सबसे आश्चर्यजनक यह है कि नाम के साथ जो निवेश राशि 2025 में दिखाई गई थी, वहीं राशि 2026 में भी दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इन कंपनियों ने दोबारा उतनी ही राशि (सेम टू सेम) के करार किए हैं या फिर ‘कॉपी पेस्ट’ में गलती हो गई है?
निश्चित रूप से वर्षों से विकास के लिए तरस रहे विदर्भ के हिस्से में जब 1.58 लाख करोड़, 5.92 लाख करोड़ लाने की बात होती है तो उत्साह-उम्मीदें दोगुनी हो जाती हैं लेकिन जब इस प्रकार के आंकड़े सामने आते हैं तो उसी उम्मीद को पलीता लग जाता है और संदेह की सुई घूमने लग जाती है। निश्चित रूप से सरकार को वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
2025 में जेएसडब्ल्यू ने 25000 करोड़ रुपये का एमओयू किया था। इस बार इस समूह का आंकड़ा 4 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। जेएसडब्ल्यू ग्रुप के नाम से 3 लाख करोड़ और जेएसडब्ल्यू ग्रुप (गड़चिरोली) के नाम से 1 लाख करोड़ निवेश की बात कही गई है। इसके अलावा सूची में ‘दर्ज’ तमाम नाम 25 और 26 की सूची में ‘कॉमन’ हैं। 1.58 लाख करोड़ से 5.92 लाख करोड़ पहुंचाने में जेएसडब्ल्यू ने भी अहम भूमिका निभाई है।
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इन सभी परियोजनाओं के लिए कुल 23,276 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए 1,466 एकड़ भूमि पहले ही उपलब्ध करा दी है। जेएसडब्ल्यू जैसी बड़ी कंपनियों को ऑफर लेटर भी जारी कर दिए गए हैं।
| कंपनी का नाम | निवेश (₹ करोड़) | क्षेत्र | अपेक्षित रोजगार |
|---|---|---|---|
| जेएसडब्ल्यू ग्रुप | 3,00,000 | स्टील, एनर्जी, सीमेंट | 10,000 |
| जेएसडब्ल्यू ग्रुप (गड़चिरोली) | 1,00,000 | स्टील | — |
| पावरिंग ऊर्जा | 60,299 | ग्रीन एनर्जी | 8,000 |
| वर्धमान लिथियम | 42,535 | इलेक्ट्रॉनिक्स | 5,000 |
| वारी एनर्जी | 30,000 | ग्रीन एनर्जी | 7,500 |
| हॉयझिरो | 16,000 | ग्रीन एनर्जी | 10,000 |
| एमएनएस होल्डिंग्स | 15,000 | सोलर | 500 |
| रिलायंस कंज्यूमर | 1,513 | फूड (काटोल) | 2,000 |
| लॉयड मेटल (गड़चिरोली) | 16,580 | एनर्जी | 3,500 |
| कंपनी | निवेश |
|---|---|
| जेएसडब्ल्यू | 25,000 करोड़ |
| पावर्रिंग ऊर्जा | 8,000–9,000 करोड़ |
| वर्धमान लिथियम | 42,532 करोड़ |
| वारी एनर्जी | 30,000 करोड़ |
| हायझिरो इंडस्ट्रीज | 16,000 करोड़ |
| एमएसएन होल्डिंग्ज लि. | 14,652 करोड़ |