नागपुर में 9 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, हाई कोर्ट में वकालत करने वाला आरोपी समेत 6 गिरफ्तार

Nagpur Cyber Fraud News: नागपुर पुलिस ने आरटीजीएस के जरिए 9.88 करोड़ की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। मुंबई-दिल्ली हाई कोर्ट के वकील समेत छह आरोपी गिरफ्तार हुए हैं।
Interstate Cyber Gang Nagpur
ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह की प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- AI
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Highlights

  • पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति के बैंक खाते से RTGS के जरिए 9,88,83,999 रुपये की कथित ठगी की गई।

  • मामले में अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

  • पुलिस ने 4,20,61,162 रुपये की रकम बरामद करने की जानकारी दी।

  • जांच में 1,000 से अधिक बैंक खातों के इस्तेमाल और रकम की लेयरिंग के संकेत मिले।

Interstate Cyber Gang Nagpur: साइबर ठगी में लिप्त वकील और उसकी गैंग ने मिलकर एक व्यक्ति को 9,88,83,999 रुपये का चूना लगा दिया। पीड़ित ने साइबर सेल और बडोदा थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय ठग गैंग का पर्दाफाश कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पकड़े गए आरोपियों में मीरा रोड, ठाणे निवासी मुकेश कुमार शामशंकर मिश्र (41); गाजीपुर, उत्तर प्रदेश निवासी हनुमान कुमार खखनु राम (26); शिवनी, उत्तर प्रदेश निवासी रवि कुमार रामवृक्ष यादव (24): अजीम रफीक मिठानी (26); रांची, झारखंड निवासी राकेश शैलेश सिंह (44) और गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश निवासी अंकुर अशोक कुमार गोस्वामी (30) का समावेश बताया गया।

जानकारी के अनुसार मुकेश कुमार मुख्य आरोपी है। वह मुंबई और दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत करता है। उसने ठगी की सारी योजना बनाई थी। आरोपी मुकेश कुमार और उसकी गैंग ने बडोदा निवासी रमेश कुमार (बदला हुआ नाम) के बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिए 9।88 करोड़ की रकम उड़ा ली थी। ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने पहले साइबर सेल, नागपुर ग्रामीण और फिर वडोदा थाने में शिकायत दर्ज कराई।

बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ठाटाशा प्राइवेट - लिमिटेड, श्री फिनटेक और रेक्ट्रीकर प्राइवेट लिमिटेड जैसी - कई कंपनियां स्थापित कर साइबर ठगी की बड़ी रकम का लेन-देन किया। इसके लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।

जांब में संगठित तरीके से रकम की लेवरिंग करने और बड़े पैमाने पर मनी लॉडिंग किए जाने के संकेत मिले है। पुग्छ आरोपियों ने बैंकिंग क्षेत्र में करीब 6 से 7 साल तक काम किया है, जबकि कुछ आरोपी वर्ष 2024 में रेनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत थे। इस कंपनी के खिलाफ इंदौर में करीब 3,400 करोड़ रुपये की आर्थिक चोखाधड़ी का मामला दर्ज है।

दिल्ली, मुंबई और उप्र पहुंचीं टीमें

जांच के दौरान पुलिस को अंतरराज्यीय गैंग के बारे में सुराग मिला। ग्रामीण पुलिस की अलग-अलग टीमें दिल्ली, मुंबई और उप्र के लिए रवाना हुई। विविध राज्यों से पुलिस की टीमों ने सभी 6 आरोपियों को

गिरफ्तार किया। साथ ही ठगी की रकम में से 4,20,61,162 रुपये की राशि रिकवर की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार, अपर पुलिस अधीक्षक अनिल महस्के और सहायक पुलिस अधीक्षक शशांत एमएम के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और बडोदा थाने की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

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1,000 से अधिक खातों का उपयोग

यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों ने विभिन्न फाइनेंशियल सर्विसेस कंपनियों और पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को पेआउट के जरिए दूसरी जगह ट्रासफर किया इसके बाद रकम नकद निकालकर हवाला के माध्यम से हस्तांतरित की गई। उगी की रकम की लेयरिंग कर उसे 1,000 से अधिक बैंक खातों में चुमाया गया।

बाद में विभिन्न फिनटेक कंपनियों के जरिए पेआउट के लिए इस रकम का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर उसकी लेयरिंग करने के बाद मुंबई और उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सोना खरीदे जाने का भी खुलासा हुआ है। पुलिस आगे की जांच कर रही है।

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