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नागपुर. कोरोना काल के तमाम तरह के प्रतिबंधों की वजह से शादियों का पैटर्न बदल गया था. न ही बैंड और न ही ज्यादा बाराती होते थे. मंगल कार्यालयों की बजाय लोगों ने घरों से सामने मंडप डालकर शादियां निपटा ली लेकिन जैसे ही कोरोना प्रतिबंध खत्म हुये, शादियों का शोर भी बढ़ गया. बैंड, डीजे, पटाखों की आवाज से शहरभर ध्वनि प्रदूषण बढ़ गया है. प्रशासन लाचार और बेबस होकर मुक दर्शक भी भूमिका निभा रहा है. इन दिनों शादियों का सीजन चल रहा है. जब भी कोई बारात सड़क से गुजरे तो बैंड और डीजे की आवाज दिमाग को सुन्न कर देती है.
डीजे की कानफाड़ू आवाज परिसर के लोगों के लिए मुसीबत बनने लगी है. लोग सड़क के बीचोंबीच पटाखे जलाते हैं. भयंकर आवाज वाले पटाखों से ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ गया है. नियमानुसार रात 10 बजे के बाद पटाखे नहीं जलाए जा सकते. वहीं डीजे का साउंड भी कम होना चाहिए. इसके लिए प्रशासन की ओर से गाइडलाइन भी जारी की गई है लेकिन कोई भी नियमों का पालन करने तैयार नहीं है. रात 10 बजे के बाद भी डीजे बजता रहता है और लोग मस्ती में नाचते रहते हैं.
भले ही सिटी में ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है लेकिन इसके कारणों पर नियंत्रण करने के लिए प्रशासन भी तैयार नहीं है. दरअसल, यह सब पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है. लगता है पुलिस ने लोगों को सड़कों पर मनमानी करने की खुली छूट दे रही है. वहीं प्रशासन को ध्वनि प्रदूषण से कोई लेना-देना ही नहीं है. सड़कों पर नाचते हुए बारातियों को देखकर लगता है कि पूरी सड़क ही किराये पर ले ली हो. कुछ इलाकों में जहां सड़कें तंग है, वहां जब भी कोई बारात निकलती है तो कई देर तक ट्रैफिक ही जाम हो जाता है. सामने डीजे वाली गाड़ी चलती रहती है.
लॉन वाले भी इस मनमानी में शामिल है. लॉन के भीतर डीजे बजाने और पटाखे जलाने के लिए वर-वधु पक्ष को खुली छूट दे दी जाती है. लॉन वाले पुलिस और प्रशासन को सेट करने के बदले अतिरिक्त रकम भी लेते हैं. पटाखों की चिंगारी से आसपास कोई दुर्घटना हो जाये तो भी बारातियों को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें मालूम है कि कोई कार्रवाई नहीं करने वाला है. सभी स्तर पर बरती जा रही मनमानी का ही नतीजा है कि सिटी में ध्वनि के साथ ही वायु प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है.