नागपुर सिविल लाइंस: वीआईपी इलाके में नियमों को ताक पर रखने वाले लॉन्स रडार पर, कोर्ट के आदेश से हड़कंप

Nagpur Civil Lines: नागपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र में कथित अनधिकृत लॉन्स व मैरिज हॉल्स पर HC ने सख्त रुख अपनाया है। वैध दस्तावेजों के बिना संचालन पर रोक के संकेत से संचालकों में हड़कंप मच गया है।
Nagpur Civil Lines: Lawns flouting rules in VIP areas under scanner, court order creates stir
सिविल लाइंस, नागपुर, हाईकोर्ट, अवैध लॉन्स, (सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Illegal Lawns: नागपुर सिटी के सबसे वीआईपी और प्रशासनिक इलाके 'सिविल लाइंस' में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे लॉन्स और मैरिज हॉल्सा पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अनधिकृत व्यावसायिक निर्माणों पर एक तरह से 'सर्जिकल स्ट्राइक' कर दी है।। अदालत ने साफ कर दिया है कि बिना वैधा दस्तावेजों के एक भी लॉन या हॉल का संचालन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हाई कोर्ट के इस सख्त 'हंटर' के बाद अब तक कानून की धज्जियां उड़ाने वाले रसूखदार लॉन संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।। अपनी करोड़ों की अवैध संपत्तियों और रसूख को बचाने के लिए इन संचालकों ने अब नगर रचना (टाउन प्लानिंग) और अग्निशमन (फायर) विभाग के चक्कर काटने शुरू कर दिए हैं।

क्या काम करेगा हाई कोर्ट का हंटर

इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल नागपुर मनपा प्रशासन की साख पर खड़ा हो गया है। जब तक यह मामला कोर्ट में नहीं गया था तब तक मनपा के जिम्मेदार अधिकारी सिविल लाइंस में चल रहे इन अवैध लॉन्स की तरफ से आंखें मूंदे बैठे थे। अब जबकि मामला सीधे हाई कोर्ट की निगरानी में है तो दोनों विभागों (नगर रचना और फायर) के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या पैसों की ताकत और प्रशासनिक साठगांठ के दम पर ये रसूखदार लॉन्स मालिक कानून की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहेंगे या फिर नागपुर हाई कोर्ट का हंटर इन सफेदपोश माफियाओं के अवैध साम्राज्य को हमेशा के लिए जमींदोज कर देगा।

'लक्ष्मी दर्शन' के दम पर सिस्टम को खरीदने की चुनौती

करोड़ों रुपये की व्यावसायिक संपत्तियों और हर सीजन में होने वाली लाखों की कमाई को बचाने के लिए लॉन मालिक इस समय पानी की तरह पैसा बहाने को तैयार हैं। 'लक्ष्मी दर्शन' के दम पर मनपा के अधिकारियों और कर्मचारियों को साधने की कोशिशें चरम पर हैं। संचालकों को उम्मीद है कि मोटी रकम के बल पर वे रातों-रात कागजी कोरम पूरा कर लेंगे और न्यायालय के समक्ष 'क्लीन चिट' के दस्तावेज पेश कर देंगे। इस खेल में 'साम-दाम-दंड-भेद' की हर उस नीति का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे प्रशासनिक तंत्र उनके सामने घुटने टेक दे।

बैक डेट से मंजूरी पाने का 'मास्टर प्लान'

हकीकत यह है कि सिविल लाइंस जैसे संभ्रांत इलाके में स्थित अधिकांश लॉन्स के पास नियमानुसार कोई पुख्ता कागजात नहीं है। अब जब गर्दन पर कानूनी तलवार लटकी है तो ये मालिक पिछली तारीख (बैकडेट) से एनओसी और मंजूरियां तैयार करवाने की जुगत में लग गए है।

इसके लिए शहर के बड़े दलालों, रसूखदारों और मंत्रालय तक पहुंच रखने वाले बिचौलियों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो गया है। सूत्रों का कहना है कि यह पूरा खेल इस तरह रचा जा रहा है कि कोर्ट में यह साबित किया जा सके कि नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ बल्कि प्रक्रिया पहले से ही जारी थी।

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