स्कूल बस बनीं नागपुर मनपा की आपली बसें; पूर्वी नागपुर में नियमों को ताक पर रखकर छात्रों का ट्रांसपोर्टेशन

Nagpur School Transport: नागपुर में मनपा की चार 'आपली बसें' छात्रों को स्कूल पहुंचा रही हैं। इस व्यवस्था की वैधानिक मंजूरी और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
Nagpur Municipal Corporation’s ‘Aapli Bus’ fleet pressed into service as school buses; student transportation in East Nagpur flouts regulations.
नागपुर मनपा, आपली बस, स्कूल बस(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
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Nagpur Aapli Bus Schools: नागपुर महानगर पालिका (मनपा) की कम से कम चार 'आपली बसें' पूर्वी नागपुर के स्कूलों के छात्रों को लाने-ले जाने का काम कर रही हैं। ये बसें छात्रों को उनके आवासीय इलाकों से पिक कर सीधे स्कूल परिसर के अंदर छोड़ रही हैं। इस व्यवस्था पर कुछ लोग गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, विशेषकर सुरक्षा मानकों और वैधानिक मंजूरी को लेकर।

क्या है मामला और विवाद

सामने आए वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि 'आपली बसें लकड़गंज इलाके के स्कूल परिसरों में प्रवेश कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए छात्रों को 'आपली बस' प्रणाली के तहत रियायती बस पास जारी किए गए हैं, जो वैध हैं।

मनपा के परिवहन विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह सेवा पूर्वी और दक्षिणी नागपुर के कुछ स्कूलों के अनुरोध पर शुरू की गई थी। हालांकि जब यह पूछा गया कि क्या इन बसों के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से कोई मंजूरी ली गई है, तो एक अधिकारी ने माना कि ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई है।

RTO के नियम और सुरक्षा

एक वरिष्ठ आरटीओ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 'महाराष्ट्र मोटर वाहन (स्कूल बसों के लिए नियम)' के तहत स्कूल के बच्चों को ढोने वाले वाहनों के लिए कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करना और आवश्यक वैधानिक मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य है। अधिकारी ने कहा कि एक सिटी बस को बिना निर्धारित नियामक प्रक्रिया का पालन किए सामान्य रूप से स्कूल बस में नहीं बदला जा सकता।

एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल

यह मामला 'चलो मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड' की कार्यप्रणाली का परिणाम है, जो मनपा की 'आपली बस' सेवा के लिए इंटीग्रेटेड बस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट (आईबीटीएम) एजेंसी है। हालांकि एजेंसी बसों की मालिक नहीं है, लेकिन शेड्यूलिंग, टिकट और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की जिम्मेदारी उसी की है। यदि इस मामले में कोई जांच शुरू होती है, तो एजेंसी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है।

परिवहन समिति के सदस्य शैलेश पांडे ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सवाल किया है कि मनपा किस नीति के तहत यह स्कूल बस सेवा चला रही है। यदि कोई वैधानिक मंजूरी नहीं ली गई है, तो यह व्यवस्था विनियामक कार्रवाई को निमंत्रण दे सकती है और ऐसी अन्य सेवाओं की भी समीक्षा हो सकती है।

बच्चों के लिए 'आपली बस' सुरक्षित

वहीं कुछ जानकारों का कहना है कि मनपा ने छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया है। छात्रों को अपने घरों से सीधे स्कूल परिसर तक पहुंचने में सुविधा मिल रही है। यह पहल न केवल छात्रों के लिए सुरक्षित है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन के प्रति विश्वास भी बढ़ा रही है। यह जरूर है कि नियमों का पालन होना चाहिए।

जानकारों का मानना है कि खाली बसें चलाने के बजाय उनका उपयोग स्कूल सेवा में करने से बसों की ऑक्यूपेंसी (उपयोगिता) में भी वृद्धि होगी, जिससे परिवहन विभाग की राजस्व स्थिति सुधरेगी।

मनमानी करने वाले बस संचालकों को इससे सबक भी मिलेगी। जानकारों का कहना है कि यह कोई पहला अवसर नहीं है। मनपा और मेट्रो इससे पहले कई शैक्षणिक संस्थान, कंपनियों, फैक्ट्रियों से भी करार कर चुकी हैं। उन्हें बस सेवा उपलब्ध हो रही है।

स्कूली छात्रों को ले जाने वाली बसों के लिए कड़े मानदंड

  • जीपीएस-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम
  • सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन
  • अग्नि शमन प्रणाली
  • सीट बेल्ट और बढ़ी हुई जवाबदेही
  • फर्स्ट एड बॉक्स
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