पहले सड़क बनाने में उड़ाए करोड़ों, अब तोड़ने और दोबारा पैचवर्क में लगेगा पैसा; नागपुर मनपा पर भड़के लोग

Nagpur Khamla Cement Road: नागपुर में खामला-सोनेगांव मार्ग पर डेढ़-दो साल पहले बनी सीमेंट सड़क पाइपलाइन बिछाने के लिए फिर तोड़ दी गई, जिससे नागरिकों ने इसे करदाताओं के पैसे की बर्बादी बताया।
Crores were squandered on building the road initially, and now money will be spent on tearing it up and patching it again; people are furious with the Nagpur Municipal Corporation.
नागपुर सड़क, सीमेंट रोड, प्रदेश महासचिव हेमंत गडकरी, प्रतीकात्मक तस्वीर(सोर्स: एआई फोटो)
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Nagpur Khamla Cement Road Pipeline Work: नागपुर सिटी में विकास कार्यों के पूरा होते ही उन्हें दोबारा तोड़ने की घटनाएं अब नई नहीं रह गई हैं। विशेष रूप से सीमेंट की सड़कों और पेवर ब्लॉक से बने फुटपाथों को बार-वार खोदा जाना आम बात हो गई है। खामला से सोनेगांव जाने वाले मार्ग पर सहकारनगर घाट के सामने करीब डेढ़-दो वर्ष पहले बनाई गई सीमेंट सड़क को पाइपलाइन बिछाने के लिए तोड़ दिया गया।

इससे एक बार फिर मनपा की लचर कार्यप्रणाली उजागर हो गई है। रोड के तोड़े जाने से क्षेत्र के नागरिकों में भारी नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले सीमेंट सड़क बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए और अब उसे तोड़ने पर फिर पैसा खर्च हो रहा है।

बाद में दोबारा सड़क बनाने पर भी जनता का पैसा ही खर्च होगा। यह करदाताओं के धन की खुली बर्बादी है। लोगों ने आशंका जताई कि बाद में इसकी भरपाई के लिए उन पर नया कर लगाया जाएगा।

सीएम, गडकरी के निर्देश की सुनवाई नहीं

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रयासों से शहर में हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण इन्हीं विकास कार्यों को बाद में तोड़ा जा रहा है।

दोनों नेताओं ने कई बैठकों में विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने, उचित योजना के साथ कार्य करने और निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए थे लेकिन इन निर्देशों का प्रशासन पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। कभी पाइपलाइन तो कभी अन्य कार्यों के लिए सड़कों और फुटपाथों की खुदाई कर दी जाती है।

कई बार किसी काम के पूरा होने के 2-3 महीने बाद ही उसी स्थान पर फिर खुदाई शुरू कर दी जाती है। दीक्षाभूमि से नीरी के सामने तक का फुटपाथ भी इसी तरह तोड़ा गया था। मेडिकल से रामेश्वरी जाने वाली सीमेंट सड़क तथा खामला चौक से प्रतापनगर जाने वाली सड़क की भी यही स्थिति हुई। जी-20 सम्मेलन के दौरान जिस वर्धा रोड को विशेष रूप से सजाया गया था वहां भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।

क्या सो रहा था प्रशासन : हेमंत

मनसे के प्रदेश महासचिव हेमंत गडकरी ने सवाल उठाया कि यदि यहां नई पाइपलाइन बिछानी थी, तो 2 वर्ष पहले सड़क निर्माण की निविदा प्रक्रिया के समय ही इसका समन्वय क्यों नहीं किया गया। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़क को अब मशीनों से तोड़ा जा रहा है, इस नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मनपा प्रशासन और सत्तारूढ़ दल को अब जनता की नाराजगी की कोई परवाह नहीं है। कुछ पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए बिना किसी उचित योजना के डेढ़-दो साल पहले करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़क को तोड़ा जा रहा है।

दूसरी ओर, मनपा की आर्थिक स्थिति सुधारने के नाम पर संपत्ति कर बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी समिति की अध्यक्ष शिवानी दाणी इसी वार्ड की निर्वाचित प्रतिनिधि हैं और वित्तीय मामलों की अच्छी जानकारी रखती हैं। इसके बावजूद यदि इस तरह करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति बर्बाद हो रही है तो यह चिंता का विषय है।

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