

Highlights
नागपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर चौकीगढ़ में स्थित है भवानी माता का मंदिर।
नवरात्रोत्सव के दौरान मंदिर में 1311 अखंड ज्योतियां प्रज्वलित की गई हैं।
वेणा नदी के उद्गम स्थल से जुड़ा है मंदिर का ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व।
पूजा, आरती, गरबा, माता जागरण, गोंधड़ और कीर्तन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
Katol Nagpur Navratri News: नागपुर से महज 40 किलोमीटर दूर वेणा नदी के उद्दम स्थल पर स्थित चौकीगढ़ की भवानी माता का मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। वर्तमान नवरात्रोत्सव में यहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की धूम है और दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
श्रद्धालुओं की गहरी श्रद्धा है कि यह माता सभी की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। यह धाम 1311 अखंड ज्योति से जगमगाया नजर आ रहा है और श्रद्धालुओं का तांता लगा है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्राकृतिक सौदर्य वेणा नदी का उद्म मादागड-टेडकड्या (चौकीगढ़) में होता है।
यहां कभी एक छोटा किला या निगरानी चौकी हुआ करती थी, जिसके अवशेष आज भी देखने को मिलते हैं। ऐसा कहा जाता है कि नागपुर के भोसले राजे युद्ध पर जाने से पहले इस स्थान पर आशीर्वाद लेने आते थे। समय के साथ यह प्राचीन मंदिर ध्वस्त हो गया था, लेकिन अब इसका भव्य रूप से पुनर्ननिर्माण किया गया है।
प्राचीन शिल्पखंड और पुराने मंदिर के अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं। प्रराकृतिक सुंदरता और दुर्गम क्षेत्र में स्थित होने के कारण वेणा नदी के उद्म स्थल पर इस मंदिर की छटा देखते ही बनती है।
नवरात्रोत्सव के अवसर पर मंदिर में आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में प्रतिदिन सुबह-शाम विधि-विधान से पूजा, आरती और प्रसाद वितरण, गरबा, माता जागरण, गोंधड़ और कीर्तन जैसे सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।
इस मंदिर में हर साल नवरात्रोत्सव के दौरान अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है। इस ज्योति के लिए न केवल नागपुर जिले से, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी भक्त अपनी राशि भेजकर अपने नाम की अखंड मनोकामना ज्योत प्रज्वलित
करवाते हैं। इस बार उत्सव में कुल 1311 अखंड ज्योतियों से भवानी धाम मंदिर जगमगा उठा है। 'मां भवानी माता सेवा समिति' चौकीगढ़, मरकसूर, तहसील काटोल, जिला नागपुर के नेतृत्व में मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सड़क, भक्त निवास और भोजनालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
देवी भागवत स्कंद पुराण के अनुसार, इसे 108 शक्तिपीठों में से सातवें नंबर का शक्तिपीठ माना जाता है। वेणा नदी के तट पर बसे इस पवित्र स्थान पर मां अमृता देवी के रूप में माता के चास का उल्लेख मिलता है। नवरात्र के इन दिनों में हजारों भक्त यहां नतमस्तक होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।