

Highlights
भोपाल STF ने कथित फर्जी पासपोर्ट मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
पूछताछ में नागपुर के पलाश बिपिन चौधरी का नाम कथित मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आने की जानकारी है।
जांच एजेंसियों को 250 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी भारतीय दस्तावेज दिलाने के कथित नेटवर्क का संदेह है।
किराए के मकान, पते के प्रमाण और पहचान संबंधी दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग की जांच हो रही है।
भोपाल STF और नागपुर ATS नेटवर्क के अंतरराज्यीय संपर्कों तथा फरार आरोपी की तलाश कर रही हैं।
Bangladesh Fake Passport Racket: मानव तस्करी के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, जिसे कथित तौर पर नागपुर से मुख्य आरोपी पलाश बिपिन चौधरी चलाता था, पर फिर से जांच शुरू हो गई है। भोपाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हाल ही में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और वे नागपुर की एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) यूनिट के साथ मिलकर फरार आरोपी की तलाश कर रहे हैं।
पलाश बिपिन चौधरी पर आरोप है कि उसने 250 से ज़्यादा बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में घुसने, नकली भारतीय दस्तावेज़ हासिल करने और अलग-अलग शहरों में बसने में मदद की। सूत्रों के मुताबिक, पलाश बिपिन चौधरी सितंबर में नागपुर से भाग गया था।
जब भोपाल STF उसे और तस्करी के एक अन्य संदिग्ध, जॉइसन चौधरी को खोजने के लिए शहर आई थी। पलाश की लोकेशन का पता पहले पश्चिम बंगाल और फिर त्रिपुरा में चला था और जांचकर्ताओं का मानना है कि वह खुली सीमा पार करके बांग्लादेश भाग गया होगा।
नागपुर पुलिस को शक है कि पलाश बिपिन चौधरी ने नागपुर को अपना बेस बनाया था और साथ ही मध्य प्रदेश (भोपाल), पश्चिम बंगाल, तेलंगाना (हैदराबाद) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में भी अपने संपर्क बनाए रखे थे।
सूत्रों ने बताया कि 2023 में नागपुर ATS ने उसे गिरफ्तार किया था, जब एक जांच में अवैध रूप से लोगों को लाने और नकली पासपोर्ट बनवाने के रैकेट का पता चला था।
ताजा घटनाक्रम भोपाल में दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद सामने आया है, जो कथित तौर पर नकली भारतीय पासपोर्ट बनवाने की कोशिश कर रहे थे।
पूछताछ के दौरान, उन दोनों ने कथित तौर पर पलाश बिपिन चौधरी का नाम मास्टरमाइंड के तौर पर लिया। पलाश बिपिन चौधरी ने ही उन्हें त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश की खुली सीमा से भारत में घुसने में मदद की थी और फिर उन्हें भोपाल लाया था।
आरोप है कि पलाश ने कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को शक से बचाने के लिए बांग्लादेशी नागरिकों को शक से बचाने के लिए बौद्ध भिक्षु का भेष धारण करने में मदद की। उस पर पूर्वोत्तर के रास्ते उन्हें लाने और कुछ लोगों को बिहार ले जाने का शक है, जहाँ कथित तौर पर उन्हें भिक्षु जैसा दिखने की ट्रेनिंग दी गई और फिर नागपुर और अन्य शहरों में भेजा गया।
सूत्रों का दावा है कि इस व्यवस्था के तहत लगभग 50 बांग्लादेशी नागरिकों को नागपुर लाया गया था। जांचकर्ता इन आरोपों की भी जांच कर रहे हैं कि पलाश ने अवैध रूप से भारत में घुसने, रहने की जगह और भारतीय ID कार्ड दिलाने के लिए प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये तक लिए थे।
दस्तावेजो में हेरफेर करने की प्रक्रिया में किराए पर घर लेना, किराए के एग्रीमेंट और यूटिलिटी बिल का इस्तेमाल पते के सबूत के तौर पर करना और उसके बाद आधार कार्ड, बैंक खाते, पैन कार्ड और पासपोर्ट हासिल करना शामिल था।
जांचकर्ताओं को शक है कि इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल नकली भारतीय पहचान बनाने के लिए किया गया था। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस नेटवर्क ने कम से कम 250 फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनवाने में मदद की होगी। इसके बाद, जिन लोगों को फायदा पहुंचाया गया, उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में भेज दिया गया।
खबरों के मुताबिक, उनमें से कुछ ने अपनी नई पहचान का इस्तेमाल करके विदेश की यात्रा भी की। हैदराबाद एयरपोर्ट पर दो अवैध प्रवासी भी पकड़े गए। अपने बयान में, पलाश ने कथित तौर पर माना कि वह 2012 में बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आया था और उसने अपने कुछ परिचितों को भारतीय दस्तावेज हासिल करने में मदद की थी।
एक अधिकारी ने कहा, पलाश ने यह भी बताया कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में मदद करने के लिए उसने स्थानीय संपर्कों और पतों का इस्तेमाल किया था।" जांचकर्ता अब कई राज्यों में इस नेटवर्क के कनेक्शन, पासपोर्ट धोखाधड़ी के दायरे और इसमें शामिल अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका की जाँच कर रहे हैं।