

Maharashtra Ashramshala Controversy: अमरावती में आश्रमशालाओं की बदहाली दिव्यांगों के मानदेय छात्रावासों और स्कूलों से जुड़ी समस्याओं को लेकर शिवसेना नेता एवं प्रहार जनशक्ति पार्टी प्रमुख बच्चू कड़ू ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित मंत्री अतुल सावे ने दिए गए आश्वासनों को जल्द पूरा नहीं किया तो उनके खिलाफ विधानमंडल में हक्कभंग का प्रस्ताव लाया जाएगा।
मीडिया से बातचीत में कड़ू ने कहा कि उन्होंने आश्रमशालाओं से जुड़े कई मुद्दे विधानमंडल में उठाए थे। उस समय मंत्री अतुल सावे ने मुख्यमंत्री से चर्चा कर समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिया था। लेकिन आश्वासन दिए जाने के करीब एक महीने बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
बच्चू कड़ू ने कहा कि सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों को पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए सहयोगी दलों और जनप्रतिनिधियों को अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।
उन्होंने आश्रमशालाओं की समस्याओं के साथ दिव्यांगों के मानदेय, छात्रावासों और स्कूलों से संबंधित लंबित मामलों पर भी तत्काल निर्णय लेने की मांग की। कड़ू ने संकेत दिया कि यदि सरकार ने इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया तो आगे आंदोलनात्मक रुख अपनाया जा सकता है।
राजनीतिक मुद्दों पर बात करते हुए कड़ू ने कहा कि कोई भी संगठन किसी एक परिवार तक सीमित नहीं होता। उसके पीछे अनेक लोगों का त्याग और संघर्ष होता है। शिवसेना और उसके ‘शेर’ हमेशा बने रहेंगे।
शिवसेना और धनुष-बाण चुनाव चिन्ह को लेकर उन्होंने विश्वास जताया कि फैसला एकनाथ शिंदे के पक्ष में ही आएगा। उन्होंने कहा कि राजनीति केवल किसी व्यक्ति के नाम या चुनाव चिन्ह के सहारे नहीं चलती, बल्कि कार्यकर्ताओं और संगठन की ताकत भी महत्वपूर्ण होती है।
राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर भी बच्चू कड़ू ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार को ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।
उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों का उल्लेख करते हुए महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की। कड़ू ने कहा कि अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केवल घोषणाओं के बजाय जमीन पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।