नागपुर में गूंजी तालियों की गड़गड़ाहट! दिग्गज अभिनेता अशोक सराफ का सत्कार, सीएम फडणवीस ने किया सम्मानित

Ashok Saraf Felicitation: प्रसिद्ध अभिनेता पद्मश्री अशोक सराफ का 80वें वर्ष में पदार्पण पर नागपुर में नागरिक सत्कार किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका गौरव किया।
Grand felicitation for Ashok Saraf as he enters his 80th year
अशोक सराफ के 80वें वर्ष में भव्य सम्मानसोर्स-x
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Ashok Saraf Theatre Journey: 'सिनेमा एक बार चित्रित हो जाने के बाद उसका सफर वहीं समाप्त हो जाता है लेकिन नाटक का हर प्रयोग कलाकार को खुद को नए सिरे से तलाशने का अवसर देता है। हर मंचन के साथ इम्प्रोविजेशन की कला विकसित होती है और कलाकार खुद में भी कुछ नया खोजता रहता है, इसलिए रंगमंच कलाकार को लगातार विकसित होने का मौका देता है,' यह विचार प्रसिद्ध अभिनेता पद्मश्री तथा महाराष्ट्र भूषण अशोक सराफ ने व्यक्त किए, मराठी रंगमंच, फिल्मों और दूरदर्शन के क्षेत्र में अपने सहज, हास्य और अष्टपैलू अभिनय से दशकों से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले अशोक सराफ के 80वें वर्ष में पदार्पण के उपलक्ष्य में नागपुर में एक भव्य नागरिक सत्कार समारोह का आयोजन किया गया।

नागपुर महानगरपालिका, श्री सिद्धिविनायक सेवा ट्रस्ट और विदर्भ गौरव प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में सिविल लाइन्स स्थित देशपांडे सभागृह में यह संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों अशोक सराफ का गौरव किया गया।

इस अवसर पर महापौर नीता ठाकरे, उपमहापौर लीला हाथीबेड, स्थायी समिति अध्यक्षा शिवानी दाणी-वखरे, सत्ता पक्ष नेता नरेंद्र बोरकर और विरोधी पक्ष नेता संजय महाकालकर प्रमुख रूप से उपस्थित थे। प्रसिद्ध अभिनेता पुष्कर श्रोती ने अशोक सराफ से संवाद साधते हुए उनके लंबे अभिनय सफर के विभिन्न पहलुओं को उभारा।

80 दीयों से अभिनंदन

सत्कार समारोह के दौरान अशोक सराफ का 80 दीयों से ओक्षण कर उनका अभिनंदन किया गया। इस दौरान उनके अभिनय के योगदान का गौरव करते हुए वक्ताओं ने करोड़ों दर्शकों के जीवन में आनंद भरने वाले इस अनूठे कलाकार की प्रशंसा की।

रंगमंच पर लौटने के पीछे यही एक ध्येय

उन्होंने कहा कि नाटक का हर प्रयोग अलग होता है। कलाकार को हर बार नए तरीके से भूमिका को महसूस करने और उससे खुद को विकसित करने का अवसर मिलता है। रंगमंच पर दोबारा लौटने के पीछे भी यही उद्देश्य है।

रंगमंच पर पुनरागमन के बाद की यादें साझा करते हुए सराफ ने दर्शकों के प्रेम का विशेष उल्लेख किया। उनके प्रवेश के समय बजने वाली तालियों की गड़गड़ाहट के कारण कई बार नाटक को कुछ समय के लिए रोकना पड़ता था।

नागपुरकरों का प्रेम अटूट

सत्कार का उत्तर देते हुए अशोक सराफ भावुक हो गए। 'यह सत्कार हमेशा मेरे दिल में बसा रहेगा। आज अंदर से महसूस हो रहा है कि मैंने सचमुच कुछ काम किया है। नागपुरकरों का प्यार अटूट है, इन शब्दों में उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त की।

किरदार का केवल अभिनय नहीं, उसके अंतरंग की तलाश

हास्य भूमिकाओं के साथ-साथ गंभीर और अलग तरह के किरदार निभाने का मौका मिलने का जिक्र करते हुए उन्होंने 'भस्म' जैसी फिल्म का विशेष उल्लेख किया। किसी किरदार को निभाते हुए केवल उस व्यक्ति की नकल करना काफी नहीं होता, उस व्यक्ति ने किसी परिस्थिति में क्या किया होता, उसने कैसी प्रतिक्रिया दी होती, इसका अध्ययन करना अधिक महत्वपूर्ण होता है।

संवेदनशील इंसान के रूप में भी श्रेष्ठ : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हास्य में सहजता, अभिनय में स्वाभाविकता और हर भूमिका को अलग पहचान देने वाले अशोक सराफ ने मराठी फिल्म जगत को नई दिशा दी। उन्होंने हास्य भूमिकाओं के साथ ही गंभीर किरदारों को भी उतनी ही दमदार शैली में निभाया।

इसलिए अशोक सराफ केवल बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान के रूप में भी श्रेष्ठ हैं। 'धुमधड़ाका' और 'बनवाबनवी' जैसी हास्य फिल्मों से लेकर गंभीर भूमिकाओं तक सराफ के अभिनय का आज सही मायने में सम्मान हुआ है।

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