आशा भोसले के साथ शुभदा फडणवीस (सौजन्य-नवभारत)
Asha Bhosle Nagpur Connection: रविवार को सुरों की रानी आशा भोसले का निधन हो गया। उनके नागपुर से जुड़े कई किस्से हैं। वरिष्ठ साहित्यकार शुभदा फडणवीस ने उन्हें याद करते हुए नागपुर के साथ जुड़े पलों के बारे में बताया। शुभदा ने बताया कि वर्ष 2008 में आधार, जीवनगानी मुंबई और मैत्री परिवार द्वारा आयोजित आशा भोसले के कार्यक्रम को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली।
उनके साथ मेरे व्यक्तिगत संबंध भी काफी अच्छे थे। भोसले मुझे ‘मोठी टिकलीबाई’ कहकर बुलाती थीं। वे दिन बहुत ही स्वप्निल और उत्साहवर्धक थे। पिछले वर्ष आशा भोसले (Asha Bhosle) सरसंघचालक डॉ. मोहन भगवत से मिलने आई थीं। हालांकि वे थकी हुई थीं लेकिन बेहद ऊर्जावान थीं।
वे चुटकुले सुनाकर लोगों को हंसाती थीं और खूब हंसती थीं। वे लता मंगेशकर की नकल भी करती थीं। उनका व्यक्तित्व बेहद जीवंत था। हम साथ में लक्ष्मीनगर स्थित होटल में खाना खाने गए थे। उस समय उनका पोता उनके साथ था। आशुतोष शेवालकर ने आशा भोसले को याद करते हुए बताया कि हम घर पर अमर भक्ति गीतों पर चर्चा किया करते थे। हमें उनकी सुरीली आवाज में अनेक गीत सुनने का अमूल्य सौभाग्य प्राप्त हुआ।
विदर्भ साहित्य संघ के पूर्व ग्रंथ संचालक विवेक अलोनी ने बताया कि यशवंत स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम ने मुझे सुरों की रानी आशा भोसले (Asha Bhosle) से मिलने का अवसर दिया। सात सुरों पर उनकी महारत और मौन में डूबे श्रोताओं का भाव आज भी मेरी स्मृति में अंकित है। वह एक मंत्रमुग्ध कर देने वाली शाम थी। वह शाम हमेशा याद रहेगी जब सुरों की रानी जिन्होंने सुरों पर अपना प्रभुत्व जमाया, भव्य मंच पर गा रही थीं।
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सप्तक के प्रमुख विलास मानेकर ने बताया कि सप्तक ने अप्रैल 1989 में ‘स्वर्गगंधा’ कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में आशा भोसले, हरिहरन और सुदेश भोसले भी उपस्थित थे। इसके बाद अप्रैल 1997 में सप्तक, वीसा संघ और दीनानाथ स्मृति प्रतिष्ठान ने नागपुर में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया था। उस समय आशा भोसले द्वारा गाए गए मराठी गीत आज भी याद किए जाते हैं।