

Nagpur Amrut 2 Roadworks: नागपुर महानगरपालिका की बैठक में 'अमृत-2 योजना' के तहत किए जा रहे कार्यों और शहर की खस्ताहाल सड़कों को लेकर भारी बवाल हुआ। विपक्षी पार्षद अभिजीत झा ने सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर ठेकेदारों की मनमानी, घटिया निर्माण कार्य और मनपा अधिकारियों की घोर लापरवाही पर कड़े सवाल उठाए।
हालात की गंभीरता और जन आक्रोश को देखते हुए महापौर नीता ठाकरे ने सख्त निर्देश दिए हैं कि झूठ बोलने वाले अधिकारी 8 दिन के भीतर काम सुधारें, वरना उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अमृत योजना के नाम पर जानलेवा गड्ढे और बोगस काम झा ने आरोप लगाया कि अमृत योजना का काम पूरी तरह से बोगस और निचले दर्जे का है। ठेकेदार बिना किसी साइट विजिट और निरीक्षण के केवल ऑफिस में बैठकर नक्शों पर लकीरें खींचकर काम कर रहे हैं। शहर भर में खुदाई करके सड़कों को खतरनाक स्थिति में छोड़ दिया गया है जिसके कारण आए दिन महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों के एक्सीडेंट हो रहे हैं।
सदस्य ने आरोप लगाया कि मुख्य ठेकेदार ने काम को लगभग छोटे ठेकेदारों में बांट दिया है जिससे गुणवत्ता पूरी तरह खत्म हो गई है। ठेकेदार के इस घटिया काम के वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें मिट्टी के साथ सीमेंट मिलाकर काम करते हुए देखा जा सकता है जो तकनीकी रूप से पूरी तरह गलत है। अधिकारियों ने किया सदन को गुमराह पार्षदों का सबसे ज्यादा गुस्सा अधिकारियों के रवैये पर फूटा।
सदस्य ने बताया कि उन्होंने पिछले 3 महीनों में 52 बार शिकायत की लेकिन विभाग के अधिकारियों ने गुमराह करते हुए दावा किया कि काम पूरा हो चुका है। जब सदस्य ने जीपीएस कैमरे से ली गई ताजा तस्वीरें सदन में पेश कीं तब जाकर अधिकारियों के झूठ की पोल खुली। यह भी सामने आया कि कंपनी के सुपरवाइजर ने खुद फोन पर माना है कि रेस्टोरेशन (सड़क सुधार) का काम ठीक से नहीं हुआ है।
प्रभाग-14 में काम कर रही कंपनी की मनमानी को लेकर केंद्रीय मंत्री द्वारा भी पूर्व में मनपा को कड़ी सूचना दी जा चुकी है लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से काम जस का तस है। चेन्नई की तर्ज पर बने 'रेस्टोरेशन पॉलिसी', ठेकेदार का रुके पेमेंट बैठक में चेन्नई कॉर्पोरेशन का उदाहरण देते हुए सिटी में भी एक विस्तृत 'कॉम्प्रेहेंसिव रेस्टोरेशन पॉलिसी' बनाने की मांग की गई।
सत्ता पक्ष नेता बाल्या बोरकर ने कहा कि बिना अनुमति या 1 किलोमीटर की अनुमति लेकर 2 किलोमीटर तक खुदाई करने वाले विभागों (जैसे बिजली विभाग/MSEDCL) पर लगाम लगाई जानी चाहिए। यदि कोई कंपनी सड़क खोदकर उसे तय समय में ठीक नहीं करती है तो उसकी सिक्योरिटी डिपॉजिट फ्रीज की जानी चाहिए और उनसे रेस्टोरेशन चार्जेस वसूले जाने चाहिए, जब तक ठेकेदार द्वारा किए गए पूरे काम की सघन जांच नहीं हो जाती तब तक किसी भी कंपनी को भुगतान न किया जाए।
पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए महापौर ने प्रशासकीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। जिन हलगर्ज' अधिकारियों ने काम पूरा होने की झूठी रिपोर्ट देकर सदस्यों को गुमराह किया है उन्हें अगले 8 दिनों के भीतर उसी जगह पर जाकर गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करवा कर देना होगा।
यदि इसमें कोताही बरती गई तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिस ठेकेदार को काम दिया गया है उसके मुख्य मालिक और सभी संबंधित अधिकारियों के साथ अगले 3 से 4 दिनों के भीतर एक स्वतंत्र और विशेष बैठक बुलाई जाए।
शहर को विद्रूप होने से बचाने के लिए सभी जोन के सहायक आयुक्तों की जिम्मेदारी तय की जाए। खुदाई और रेस्टोरेशन पर निगरानी रखने के लिए जोन स्तर पर एक विशेष टीम (दस्ता) का गठन किया जाए।
शहर में बिना अनुमति खुदाई करने वालों पर लगाम लगाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं और काम पूरा करने की एक निश्चित समयसीमा तय की जाए, ताकि नागरिकों को होने वाली परेशानी को रोका जा सके।