33 वर्षों से फाइलों में कैद आंबेडकर स्मारक: RPI ने खोला मोर्चा, दिनेश अंडरसहारे के नेतृत्व में प्रदर्शन

Nagpur Ambedkar Memorial Protest: नागपुर में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जन्म शताब्दी स्मारक 33 वर्षों से फाइलों में अटका है। निर्माण की मांग को लेकर RPI कार्यकर्ताओं ने मनपा मुख्यालय के बाहर नारेबाजी की।
Ambedkar Memorial Trapped in Red Tape for 33 Years
आंबेडकर स्मारक को लेकर कार्यकर्ताओं का हंगामासोर्स: नवभारत फोटो
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Nagpur Ambedkar Memorial Construction Delay: नागपुर जिले में बुधवार को दोपहर मनपा मुख्यालय में उस समय कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई जब 33 वर्षों से फाइलों में कैद डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर जन्म शताब्दी स्मारक के लिए महापौर कक्ष के सामने गेट पर ही जमकर नारेबाजी शुरू हो गई। विशेषतः रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (सेक्युलर) की ओर से पहले ही सूचना दिए जाने के कारण प्रशासन की ओर से पुलिस बंदोबस्त किया गया था।

मोर्चे के पहुंचने पर पुलिस की ओर से कार्यकर्ताओं को गेट के पास ही रोक लिया गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने वहीं पर जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। मोर्चा का नेतृत्व कर रहे दिनेश अंडरसहारे ने कहा कि संविधान के शिल्पकार बोधिसत्व डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर के जन्म शताब्दी वर्ष (1991-1992) के अवसर पर प्रस्तावित भव्य स्मारक और शोध केंद्र पिछले 33 वर्षों से निर्माण की बाट जोह रहा है। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और प्रशासन की टालमटोल नीति के चलते ही यह विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

Ambedkar Memorial Trapped in Red Tape for 33 Years
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नेताओं का दोहरा मापदंड और पार्षदों की चुप्पी

आंदोलनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि नागपुर मनपा में पिछले 25-30 वर्षों से जनता ने कई नगरसेवकों को चुनकर भेजा लेकिन चुनाव जीतने के बाद ये नेता अपनी पार्टियों के आकाओं के सामने आज्ञाकारी बच्च्चों की तरह चुपचाप बैठे रहते हैं।

पार्टी ने व्यवस्था के दोहरे रवैये पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मनपा ने भट्ट सभागृह का निर्माण तुरंत करवा दिया। स्वामी विवेकानंद का भव्य पुतला बनाकर तैयार कर दिया और बाल ठाकरे के नाम से स्मारक बनाने के लिए पैसों की कमी न होने की घोषणा भी कर दी। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे इन सभी विकास कार्यों का स्वागत करते हैं लेकिन सवाल यह है कि डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर का स्मारक कब बनेगा ?

बिल्डरों की नजर और जारी रहेगा संघर्ष

शहर के मध्य स्थित इस करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन पर कई राजनेताओं और बिल्डरों की गिद्ध दृष्टि लगी हुई है। हालांकि आरपीआई (सेक्युलर) का दावा है कि पिछले 30 वर्षों से उनके लगातार सड़क पर संघर्ष करने और पहरेदारी के कारण इन स्वार्थी तत्वों की दाल नहीं गल पायी। सत्ताधारियों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जब तक जन्म शताब्दी स्मारक का निर्माण कार्य घरातल पर शुरू नहीं होता तब तक डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर जनता शांत नहीं बैठेगी।

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