अजनी पुल: दीन बुजुर्ग सा हुआ खस्ताहाल, गिन रहा आखिरी सांसें
- Written By: नवभारत डेस्क
नागपुर. कहावत है कि हद से ज्यादा बुढ़े व्यक्ति और बुढ़े मकान को छेड़ना नहीं चाहिए. हालांकि सिटी से 125 वर्षों से भी पुराने खस्ताहाल अजनी पुल को रौंदने से भी नहीं डरा जा रहा. कई वर्षों पहले ही अपनी उम्र पूरे कर चुके अजनी पुल से हर दिन हजारों वाहन गुजर रहे हैं. यह नजारा ऐसा है कि जैसे हर दिन पुल की मजबूती की परीक्षा ली जा रही हो. वहीं प्रस्तावित नये पुल की प्रक्रिया इतनी धीमी चल रही है कि शहरवासियों को शायद 12 वर्ष और इंतजार करना पड़े.
जाम और 100 से ज्यादा वाहनों का बोझ
पुल की खस्ता हालत को देखते हुए प्रशासन ने यहां से बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी है. इन्हें रोकने के लिए पुल के दोनों ओर छोटे खंभे गाड़ दिये हैं लेकिन प्रशासन द्वारा अपनाया गया इलाज समझ से पर हैं. यहां लगभग हर 10 से 20 मिनट में जाम लग जाता है. खासतौर पर सुबह 9 से 11 बजे और शाम को 5 से 9 बजे के बीच का समय तो ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है. यह लोगों के काम पर जाने और लौटने का समय होता है. इस दौरान जाम की स्थिति में पुल पर दोनों ओर से करीब छोटे-मोटे 100 से अधिक वाहन खड़े हो जाते हैं. लगता है कि जैसे पुल की भार वहन क्षमता जांची जा रही हो
गड्ढों की भरमार, दोनों छोर पर ट्रैफिक बीमार
अजनी पुल की भार वहन क्षमता परीक्षा के लिए केवल खंभे ही जिम्मेदार नहीं है. प्रशासन ने पुल पर बने सैकड़ों छोटे-बड़े गड्ढों को भी यह जिम्मेदारी सौंप रखी है. इन गड्ढों के चलते वाहन सरपट नहीं दौड़ पाते और 1 मिनट में पार होने वाले पुल पर वाहन को हिचकोले खाते 3 से 5 मिनट का समय लग जाता है. इसी चलते वाहनों की कतार लग जाती है. वहीं पुल के दोनों छोर पर ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ने की पूरी स्थिति तैयार है. अजनी कॉलोनी की ओर पुल पार होते ही सीमेंट रोड का डिवाइडर मिल जाता है तो जेल की ओर एक साथ तिराहा बना हुआ. अजनी स्टेशन, अजनी चौक और जेल चौक से वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रहती है. एक वाहन भी यदि थम जाये तो पूरा ट्रैफिक बीमार हो जाता है.
सम्बंधित ख़बरें
8 जून का इतिहास : भारतीय रंगमंच का बड़ा नाम, मशहूर पटकथा लेखक और नाट्य निर्देशक हबीब तनवीर का निधन
यवतमाल में शिवसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, जितेश नावडे और साहेबराव कांबले शिंदे गुट में शामिल
National Best Friend Day: हर राज का साथी, हर मुश्किल का हमसफर, आज है बेस्ट फ्रेंड को सेलिब्रेट करने का दिन
नवभारत संपादकीय: क्या अमेरिका-इजराइल रिश्तों में आई दरार? खुफिया गतिविधियों पर बढ़ी चिंता
… तो बड़ा विनाश तय
उक्त ब्रिज के ठीक नीचे मध्य रेल नागपुर मंडल का मुख्य रूट है. यहां से मुंबई, चेन्नई, हावड़ा और दिल्ली रूट की ओर जाने वाली ट्रेनें गुजरती है. हर वर्ष में एक न एक बार पुल की परत का कुछ हिस्सा रेलवे ट्रैक पर गिर ही जाता है और फिर पुल की जर्जर हालत की समीक्षा शुरू हो जाती है.
हालांकि समीक्षा का परिणाम हर बार एक ही रहता है कि अभी कुछ दिन पुल से काम चला लिया जाये. यह परिणाम पुल के उन पिलरों की मजबूती को नजरअंदाज करना है जो आजादी से पहले यानी करीब सवा सौ वर्षों से पत्थरों से बने पुल का वजन सह रहे हैं. आजादी के बाद भी इसमें सुधार के नाम पर कई बार डामर बिछाने से लेकर सीमेंट निर्माण के काम करवाकर इसका वजन और अधिक बढ़ा दिया गया. इसमें कोई दोराय नहीं कि यदि बुढ़े मकान से भी खस्ता हाल में पहुंच चुका अजनी पुल जिस दिन अपनी परीक्षा में फेल हुआ, उस दिन बड़ा विनाश होगा.
