आचार्य प्रशांत का VNIT नागपुर में भव्य स्वागत; छात्रों को समझाया अहंकार का दर्शन और FOMO से मुक्ति का मार्ग

Nagpur News: आचार्य प्रशांत ने VNIT नागपुर में छात्रों को FOMO और अहंकार के संकट से अवगत कराया। उन्होंने गीता के माध्यम से बताया कि कैसे संकुचित उद्देश्य जीवन और पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
Acharya Prashant at VNIT Nagpur discussed FOMO, ego, and Bhagavad Gita. He guided students on overcoming limited desires and finding deeper purpose in life and career.
आचार्य प्रशांत ,नागपुर छात्रों (फोटो-सोशल मीडिया)
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Acharya Prashant VNIT Nagpur News: नागपुर में आयोजित अपने पहले सार्वजनिक सत्र में अभूतपूर्व सहभागिता और IIIT Nagpur में हुए ऊर्जावान संवाद के बाद, विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक-लेखक Acharya Prashant का VNIT Nagpur में भव्य स्वागत किया गया। पूरे परिसर में उत्सुकता और जिज्ञासा का वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ प्राध्यापक और शोधार्थी भी इस सत्र में सक्रिय रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर युवाओं की उपस्थिति और उनकी सहभागिता यह दर्शा रही थी कि समकालीन जीवन से जुड़े गहरे प्रश्नों पर संवाद की कितनी आवश्यकता महसूस की जा रही है।

संवाद सत्र के दौरान छात्रों ने शिक्षा, करियर, मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और जीवन के उद्देश्य जैसे विषयों पर अनेक गंभीर प्रश्न उठाए। एक छात्र द्वारा “FOMO” (Fear of Missing Out) से संबंधित प्रश्न पूछे जाने पर आचार्य प्रशांत ने विस्तार से समझाया कि यह कोई आधुनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के मन की एक पुरानी प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही व्यक्ति दूसरों से तुलना करता है और स्वयं को किसी न किसी रूप में अधूरा अनुभव करता है।

इस संदर्भ में उन्होंने Bhagavad Gita का उल्लेख करते हुए बताया कि Duryodhana भी इसी मानसिकता का शिकार था। उसने अपने भीतर की असुरक्षा और तुलना की भावना के कारण ही Krishna के विरुद्ध खड़े होने का निर्णय लिया। आचार्य प्रशांत ने स्पष्ट किया कि FOMO का मूल कारण अहंकार है, जो व्यक्ति को यह विश्वास दिलाता है कि वह दूसरों से अलग और अपूर्ण है। यही अहंकार व्यक्ति को निरंतर अधिक पाने की दौड़ में लगाए रखता है, लेकिन संतोष कभी प्राप्त नहीं होने देता।

उन्होंने आधुनिक संदर्भ में जलवायु परिवर्तन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह संकट भी कहीं न कहीं उसी मानसिकता का परिणाम है, जिसमें व्यक्ति अधिक से अधिक प्राप्त करने की चाह में संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षित और संसाधन-संपन्न वर्ग में यह प्रवृत्ति अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि उनके पास विकल्प अधिक होते हैं और तुलना के अवसर भी अधिक होते हैं।

युवाओं को व्यापक उद्देश्य अपनाने का संदेश

प्रश्नोत्तर सत्र के पश्चात आचार्य प्रशांत ने Bhagavad Gita के तृतीय अध्याय के श्लोक 24 और 25 पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि Krishna ने कुरुक्षेत्र में Arjuna के सामने केवल युद्ध का औचित्य नहीं रखा, बल्कि उसके सीमित और भ्रमित दृष्टिकोण को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने छोटे-छोटे व्यक्तिगत लक्ष्यों और इच्छाओं में उलझा रहता है, तब तक उसके कर्म भी सीमित ही रहते हैं।

आचार्य प्रशांत ने यह भी रेखांकित किया कि अधिकांश लोग जीवन में बड़े उद्देश्यों की ओर इसलिए नहीं बढ़ पाते क्योंकि वे अपने विचारों और इच्छाओं को व्यापक दृष्टि से नहीं देख पाते। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि जीवन को सार्थक बनाना है, तो अपने लक्ष्यों को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखकर व्यापक सामाजिक और मानवीय संदर्भ में देखना आवश्यक है।

ज्ञात हो कि आचार्य प्रशांत इससे पूर्व देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों जैसे IITs, IIMs, AIIMS और IISc में हजारों युवाओं के साथ संवाद कर चुके हैं। नागपुर में VNIT Nagpur का यह सत्र भी उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पड़ाव साबित हुआ, जिसने विद्यार्थियों को आत्ममंथन और गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया।

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