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बेंगलुरु बनने की राह पर नागपुर! शहर बढ़ रहा, पर प्लानिंग ठप, कहीं ट्रैफिक के जाल में न फंस जाए शहर
नागपुर तेजी से फैल रहा है, लेकिन अनियोजित विकास से शहर पर भारी दबाव पड़ रहा है। भीड़, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं की कमी से बेंगलुरु जैसी स्थिति बनने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
- Written By: सौरभ शर्मा

नागपुर शहर का ट्रैफिक जाम (फोटो सोर्स -सोशल मीडिया)
नागपुर: शहर तेजी के साथ चारों दिशाओं में फैलता जा रहा है, नई-नई कॉलोनियों व बस्तियों का विस्तार हो रहा है। भीड़ तेजी से बढ़ती जा रही है। अनियोजित विकास के चलते सड़कों, मैदानों, उद्यानों के लिए जगह नहीं बच रही है। ग्रामीण भागों में रोजगार के अभाव के चलते सिटी की ओर पलायन बढ़ता जा रहा है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां पढ़ने, बेरोजगार रोजी-रोटी की तलाश में आते जा रहे हैं और अधिकतर यहीं बसते जा रहे हैं। सिटी में बढ़ती भीड़ का प्रेशर लगातार बढ़ रहा है लेकिन उस हिसाब से प्लानिंग के साथ विकास नहीं हो रहा है। यही हाल रहा तो एक दिन नागपुर सिटी का हाल भी बेंगलुरु और पुरानी दिल्ली की तरह हो जाएगा जहां सड़कों पर वाहन चलाना भी दुश्वार हो चुका है। लोगों को उनके ही शहर, तहसील, गांवों में हायर एजुकेशन, नौकरियां, मजदूरी व सारी सुविधाएं मिलें तो उनका शहरों की ओर पलायन रुक सकता है। इसके लिए ऐसे इलाकों को एनसीआर की तर्ज पर सैटेलाइट सिटी के रूप में विकसित करना होगा, लेकिन सरकार और यहां के जनप्रतिनिधियों के साथ ही जिम्मेदार प्लानिंग अथॉरिटी इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कहने को तो एनएमआरडीए बना दिया गया है लेकिन अब तक इस संदर्भ में कोई ठोस योजना सामने नहीं रखी गई है।
सुविधाएं विकसित करने में कम पड़ रही अथॉरिटी
हर वर्ष शहर में आकर बसने वालों की संख्या तो तेजी से बढ़ रही है लेकिन उस अनुपात में मनपा, एनआईटी, पीडब्ल्यूडी आदि अथॉरिटी सुविधाएं विकसित नहीं कर पा रही हैं। ट्रैफिक संभालना मुश्किल हो गया है, सड़कों पर बाजार लग रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इनर रिंग रोड और आउटर रिंग रोड के बीच के इलाके सैटेलाइट सिटी की तरह विकसित करने की जरूरत है क्योंकि दोनों रिंग रोड के बीच अभी तेजी से नई-नई कॉलोनियां बन रही हैं और अनेक बड़े निवासी स्कीम्स आ गए हैं। इन इलाकों में स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, मार्केट, उद्यान, खेल मैदान, रोजगार के साधन विकसित किये जाने चाहिए। काटोल, कलमेश्वर, भरतवाड़ा, वाड़ी, चौदामेल, डिगडोह, कापसी आदि अनेक इलाके हैं जिनका नियोजित तरीके से विकास कर डेवलप किया जा सकता है। अगर सभी इलाकों में नागपुर शहर की तरह ही सारी सुविधाएं उपलब्ध हो गईं तो लोग सिटी की ओर पलायन नहीं करेंगे।
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एजुकेशन, हेल्थ व उद्योग मस्ट
सिटी में बढ़ती भीड़ का सबसे बड़ा कारण है कि छोटे शहरों, तहसील मुख्यालयों में हायर एजुकेशन, स्वास्थ्य सुविधाएं व उद्योग ही नहीं हैं। विद्यार्थी हायर स्टडी के लिए यहां आते हैं तो काम की तलाश में बेरोजगार पलायन करते हैं, सिटी में छोटा-मोटा काम मिल ही जाता है जिससे उनकी रोजी-रोटी चल जाती है। अगर सभी तहसीलों में और छोटे शहरों में उद्योग लाए जाएं तो बेरोजगारों को उनके ही गांव के पास रोजगार मिल जाएगा। हालत तो यह है कि मिहान तक में बड़े उद्योग नहीं आ रहे हैं। इक्का-दुक्का बड़े उद्योगों को छोड़ दें तो यहां कोई इंडस्ट्री ही नहीं आ रही। तहसीलों में छोटे-छोटे उद्योग लाने या लघु व कुटीर उद्योगों के विकास के लिए कार्य किया जाए तो सिटी पर निर्भरता कम होगी लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों की उदासीनता व इच्छाशक्ति की कमी इसमें बाधा डाल रही है।
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