नागपुर में 20 साल पुराना आरक्षण रद्द: हाईकोर्ट ने 8.65 एकड़ जमीन के 51 प्लॉटधारकों को दी बड़ी राहत

Nagpur Land Reservation Case: नागपुर के वाठोडा में 8.65 एकड़ जमीन पर 20 साल से लंबित आरक्षण को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया, जिससे 51 प्लॉट धारकों को बड़ी राहत मिली।
20-Year-Old Reservation Cancelled in Nagpur: High Court Grants Major Relief to 51 Plot Holders of 8.65 Acres of Land
वाठोडा जमीन विवाद,(सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur High Court Relief Society: नागपुर वाठोडा स्थित खसरा नंबर 53, सिटी सर्वे नंबर 171 में स्थित 8.65 एकड़ जमीन सोसाइटी के सदस्यों ने खरीदी थी। 10 सितंबर 2001 को लागू हुई शहर की अंतिम विकास योजना (डेवलपमेंट प्लान) के तहत इस जमीन को 12 मीटर चौड़ी सड़क, कम्युनिटी सेंटर और पार्क के लिए आरक्षित कर दिया गया था। हालाकि 20 से अधिक वर्षों का समय बीत जाने के बावजूद प्रन्यास ने इस आरक्षण के तहत जमीन का अधिग्रहण करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

इस अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने साईबाबा नियोजित को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (शिवाजीनगर सहकारी भाडेकरू मालकी गृह निर्माण सोसाइटी लिमिटेड के प्लॉट धारकों और सदस्यों का संघ) को बड़ी राहत प्रदान की। अदालत ने मौजा वाठोडा स्थित 8।65 एकड़ जमीन पर बने 51 प्लॉटों पर से सड़क, सामुदायिक केंद्र (कम्युनिटी सेंटर) और पार्क के लिए किए गए आरक्षण को रद्द घोषित कर दिया है।

सोसाइटी ने जारी किया था खरीद नोटिस

अधिग्रहण न होने पर याचिकाकर्ताओं ने 21 फरवरी 2023 को महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम की धारा 127 के तहत प्रन्यास और अन्य संबंधित अधिकारियों को एक 'खरीद नोटिस' जारी किया। यह नोटिस एनआईटी को 22 फरवरी 2023 को प्राप्त हुआ था। नियम के अनुसार नोटिस मिलने के 24 महीने के भीतर (यानी 22 फरवरी 2025 तक) अधिकारियों को जमीन का अधिग्रहण करना था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

NIT की दलील कोर्ट ने की खारिज

सुनवाई के दौरान प्रन्यास की ओर से दलील दी गई कि सोसाइटी द्वारा दिया गया खरीद नोटिस दोषपूर्ण था क्योंकि उसमें जमीन की माघ शीट (मेजरमेंट शीट) और अन्य जरूनी दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए थे जिस पर हाई कोर्ट ने 'वाकूच सालेभाई कांट्रैक्टर बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में दिए गए हालिया फैसले का हवाला दिया, अदालत ने स्पष्ट किया कि 24 महीने की निधर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद, यदि जमीन का अधिक्षण नहीं किया जाता है तो संबंधित प्राधिकरण यह बहाना नहीं बना सकता कि नोटिस दोषपूर्ण था या उसमें शीर्षक से जुड़े दस्तावेज नहीं थे।

कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश

MRTP अधिनियम, 1966 की चाना 1271) के तहत वाढोडा के 51 प्लॉटों पर किया गया। आरक्षण अब तास हो चुका है। प्रतिवादियों को इस फैसले की प्रति मिलने के 8 सप्ताह के भीतर आधिकारिक राजपत्र (ऑफिशियल गैजेट में आरक्षण खत्म होने की अधिसूचना प्रकाशित करनी होगी।

अब प्लॉट धारक अपनी जमीन का विकास करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं, जैसा कि विकास योजना के तहत आसपास की जमीनों के लिए अनुमत है। यह फैसला उन तमाम प्लॉट घारकों के लिए एक नजीर बन सकता है जिनकी जमीने सालों से बिना किसी अधिग्रहण के सरकारी आरक्षण के जाल में फंसी हुई है।

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