

Uttan-Virar Sea Link Project Land Acquisition Protest: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी उत्तन-विरार समुद्री सेतु परियोजना के सामने एक नई और बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। भाईंदर की ओर प्रस्तावित संपर्क मार्ग के लिए जारी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का स्थानीय जमीन मालिकों और ग्रामीणों ने उग्र विरोध करना शुरू कर दिया है।
तकरीबन 600 प्रभावित जमीन मालिकों ने मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) के समक्ष अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के नोटिस भेजे गए और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए महज 15 दिनों की बेहद कम मोहलत दी गई, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जबरन जमीन छीनने का प्रयास किया गया तो पूरे क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।
पालघर जिले में विकसित हो रहे वाढवण बंदरगाह को मुंबई से तेज संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मुंबई वाढवण समुद्री मार्ग परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से उत्तन-विरार समुद्री सेतु की कुल लंबाई 55.12 किलोमीटर प्रस्तावित है। परियोजना के चरण-1 की अनुमानित लागत लगभग 58,754.71 करोड़ रुपए है।
उत्तन-विरार सी-लिंक प्रोजेक्ट में 24.35 किलोमीटर लंबा मुख्य समुद्री पुल व उत्तन, वसई और विरार में कुल 30.77 किलोमीटर लंबे तीन इंटरचेंज मार्ग प्रस्तावित है। भाईंदर की ओर प्रस्तावित संपर्क मार्ग के लिए लगभग 39.2324 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने नवंबर 2025 में उत्तन-विरार सी लिंक (फेज-1) के निर्माण को मंजूरी दी थी। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 58,754.71 करोड़ है और इसे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) पूरा करेगी।
लगभग 55.12 किलोमीटर लंबे उत्तन-विरार सी लिंक का काम पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे मुंबई-वाधवन एक्सप्रेसवे के तौर पर जाना जाएगा। सी लिंक के निर्माण और रखरखाव का खर्च निकालने के लिए टोल वसूला जाएगा।
यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उपनगरों और उत्तरी कस्बों जैसे पालघर से दक्षिण मुंबई की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता देगा, जिससे SV रोड और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर अक्सर होने वाली भारी ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी।
इस प्रोजेक्ट को अब मुंबई-वाधवन एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी कहा जाएगा, क्योंकि यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए आगे वाधवन पोर्ट से जुड़ेगा। जानकारी के लिए बता दें कि मुंबई के वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक की कुल लंबाई 17.17 किलोमीटर है; उत्तन-विरार सी लिंक का दायरा उससे कहीं ज्यादा बड़ा होगा।
इस संबंध में मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने 26 जून को प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर प्रभावित जमीन मालिकों को एफएसआई अथवा टीडीआर के रूप में मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए लगभग 600 जमीन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। आपत्तियां दर्ज कराने के लिए केवल 15 दिन का समय दिए जाने पर जमीन मालिकों ने कड़ा विरोध जताया है।
दूसरी ओर एमएमआरडीए अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया सभी कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए की जा रही है। उनकी तरफ से यह भी कहा गया है कि नागरिकों की सभी आपत्तियों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।