उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे
Uddhav Raj Thackeray BMC Dispute: करीब 20 साल तक चले मनमुटाव के बाद यूबीटी चीफ उद्धव ठाकरे व मनसे प्रमुख राज ठाकरे बीएमसी चुनाव लड़ने के लिए एक साथ आए, लेकिन दोनों भाई मिल कर भी बीजेपी शिंदे सेना को हरा नहीं सके। वहीं अब ऐसी रिपोर्ट है कि दोनों भाइयों में टकराव देखने को मिल रहा है।
इस टकराव की शुरुआत बीएमसी के स्वीकृत नगरसेवकों के बंटवारे को लेकर शुरू हुई। संख्या बल के हिसाब से यूबीटी तीन स्वीकृत नगरसेवकों को नामांकित कर सकती थी। लेकिन इसमें एक सीट मनसे अपने नेता के लिए मांगी तो उद्धव की पार्टी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इससे राज ठाकरे की मनसे नाराज हो गई और उन्होंने वार्ड कमिटी अध्यक्ष पद के चुनाव से दूर रहने का फ़ैसला किया। इस वजह से उद्धव पर प्रेशर बढ़ गया।
बुधवार को बीएमसी के 17 वार्ड कमेटी प्रेसिडेंट चुनाव के लिए नामांकन करने का आखिरी दिन था। ऐसे में मनसे की नाराजगी को दूर करने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने विशेष दूत संजय राऊत को राज से मिलने के लिए भेजा।
इन दोनों नेताओं के बीच करीब 25 मिनट चर्चा चली। मिली जानकारी के मुताबिक यूबीटी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए मनसे को अब ज्यादा प्रभाग देने का प्रस्ताव दिया है। इसके बाद दोनों दलों के बीच सुलह के आसार हैं।
ठाकरे बंधुओं के बीच विवाद की बड़ी वजह डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को माना जा रहा है। हाल ही में मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने शिंदे से उनके निवास स्थान पर मुलाकात की थी। यह मुलाक़ात उद्धव ठाकरे को रास नहीं आई थी।
उन्हें लग रहा था कि जिस शख्स ने उनसे सीएम की कुर्सी छीनने के अलावा पार्टी को तोड़ दिया। ऐसे नेता से राज को नहीं मिलना चाहिए, हालांकि राज ने कहा कि हर मुलाक़ात को राजनीति के चश्मे से देखना सही नहीं है।
ये भी पढ़ें :- 17 जनवरी की मीटिंग के बावजूद नहीं होगा एनसीपी का मर्जर, शरद पवार गुट का साफ बयान