'देवेंद्र फडणवीस, आप महिलाओं से घृणा करते हैं'; सुषमा अंधारे का पलटवार, खुली चर्चा की चुनौती स्वीकार

Sushma Andhare on Devendra Fadnavis: सुषमा अंधारे ने देवेंद्र फडणवीस को 'चांगदेव के अहंकार' और महिलाओं से घृणा करने वाला बताया। महिला आरक्षण पर खुली बहस की चुनौती स्वीकार की।
Sushma Andhare vs Devendra Fadnavis
Sushma Andhare vs Devendra Fadnavis (फोटो क्रेडिट-X)
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Sushma Andhare vs Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र की राजनीति में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा विपक्ष पर विधेयक रोकने का आरोप लगाने और चर्चा की चुनौती देने के बाद, शिवसेना (UBT) की उपनेता सुषमा अंधारे ने उन पर तीखा हमला बोला है। अंधारे ने फडणवीस को 'चांगदेव के अहंकार' से भरा हुआ बताते हुए आरोप लगाया कि वे महिलाओं को कम आंकते हैं और उनके मन में महिलाओं के प्रति घृणा है।

सुषमा अंधारे ने देवेंद्र फडणवीस और गृह मंत्री अमित शाह के 2023 के उन ट्वीट्स का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने को 'ऐतिहासिक' बताया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 2023 में ही सरकार ने दावा किया था कि विधेयक पारित हो गया है, तो आज फडणवीस इसे विपक्ष के कारण गिरा हुआ बताकर जनता को गुमराह क्यों कर रहे हैं? अंधारे ने पूछा, "कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ? क्या फडणवीस कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में झूठ बोल रहे थे?"

इस्तीफे की चुनौती और ऐतिहासिक संदर्भ

सुषमा अंधारे ने फडणवीस द्वारा आरक्षण के मुद्दे को 'भ्रूणहत्या' कहने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों की पहली 'भ्रूणहत्या' 1951 में हुई थी, जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं ने हिंदू कोड बिल का विरोध किया था। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। अंधारे ने चुनौती देते हुए पूछा, "फडणवीस साहब, क्या आप महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का साहस रखते हैं?"

सुप्रिया सुले और प्रणिति शिंदे का अपमान?

अंधारे ने आरोप लगाया कि फडणवीस ने 'स्तर' की भाषा का प्रयोग कर सांसद सुप्रिया सुले और प्रणिति शिंदे जैसे विपक्षी नेताओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि फडणवीस महिलाओं को महत्वहीन समझते हैं, इसीलिए वे ऐसी भाषा बोल रहे हैं। अंधारे ने फडणवीस को आरएसएस (RSS) के कार्यक्रम में महात्मा फुले द्वारा लिखित पुस्तकें 'गुलामी' और 'किसान का कोड़ा' पढ़ने की सलाह दी और पूछा कि इन पर मोहन भागवत की क्या प्रतिक्रिया है।

"समय और दिन तय कीजिए, मैं अकेले आऊंगी"

देवेंद्र फडणवीस की 'खुली चर्चा' की चुनौती को स्वीकार करते हुए सुषमा अंधारे ने कहा कि वे इस मुद्दे पर बहस के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर फडणवीस चर्चा नहीं बुलाते हैं, तो यह माना जाएगा कि वे सच्चाई का सामना करने से डर रहे हैं। अंधारे ने स्पष्ट किया, "आप समय और स्थान तय कीजिए, मैं अकेले भी आपके सभी सवालों के जवाब देने के लिए आने को तैयार हूँ।" इस बयान के बाद महाराष्ट्र में 'आरक्षण' की यह जंग अब निजी हमलों और सीधी चुनौतियों में तब्दील हो गई है।

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