Dharavi Redevelopment: धारावी में बनेंगे 1.5 लाख घर, अब तक 63000 ठिकानों का सर्वेक्षण पूरा
धारावी की पुनर्विकास परियोजना के तहत जारी सर्वेक्षण ने इसकी रिहायशी एवं वाणिज्यिक संरचनाओं का नक्शा बनाने और दस्तावेजीकरण के लिए 63,000 से अधिक ठिकानों का पहले ही सर्वेक्षण किया जा चुका है और यह गिनती अब भी जारी है।
- Written By: आकाश मसने
धारावी झुग्गी-बस्ती (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई: मुंबई में स्थित एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्ती धारावी की पुनर्विकास परियोजना के तहत जारी सर्वेक्षण ने इसकी रिहायशी एवं वाणिज्यिक संरचनाओं का नक्शा बनाने और दस्तावेजीकरण के लिए 2007-08 में किए गए पिछले सर्वेक्षण के स्तर को पार कर लिया है। अधिकारियों ने कहा कि 63,000 से अधिक ठिकानों का पहले ही सर्वेक्षण किया जा चुका है और यह गिनती अब भी जारी है।
धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसवीआर श्रीनिवास ने कहा कि हमारे सर्वेक्षण ने एक महत्वपूर्ण और निर्णायक मील का पत्थर पार कर लिया है। यह पुनर्विकास योजना केवल भूतल के मकानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऊपरी मंजिल की संरचनाओं को भी कवर करती है।
सर्वेक्षण का अंतिम चरण होगा शुरू
श्रीनिवास ने कहा कि हम सर्वेक्षण के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुके हैं। संख्याएं स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि धारावी के लोग पुनर्विकास के पक्ष में हैं और सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह दर्शाता है कि सरकार सभी के लिए आवास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। धारावी में कोई भी पीछे नहीं रहेगा।
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सर्वेक्षण के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 95 हजार से अधिक मकानों के लिए लेन मुआयना पूरा हो चुका है, जबकि 89 हजार से अधिक मकानों को क्रमांकित किया गया है, और 63 हजार से अधिक मकानों के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।
पिछले सर्वे से इस बार क्या अलग है?
झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) के दिशानिर्देशों के तहत केवल भूतल के निवासियों को आमतौर पर मुफ्त आवास के लिए पात्र माना जाता है। साल 2007-08 में हुए पिछले सर्वेक्षण के उलट इस सर्वेक्षण में भूतल और ऊपरी मंजिल की संरचनाएं, मौजूदा एसआरए भवन, आरएलडीए भूमि पर झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग और सभी धार्मिक संरचनाएं भी शामिल हैं।
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परियोजना को पूरा करने के लिए गठित नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (एनएमडीपीएल) लगभग 1.5 लाख आवास बनाने की तैयारी कर रही है क्योंकि अधिकांश झोपड़ियां जी+2 स्तर तक बढ़ गई हैं, जिससे पुनर्वास की जरूरत वाले आवासों की संख्या बढ़ गई है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
