बदनामी न करें ठाकरे गुट, सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख शिवसेना विवाद पर फिर नई तारीख, 30 जुलाई को होगी सुनवाई
Shiv Sena Case SC Hearing: शिवसेना नाम और निशान विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने ठाकरे गुट को मीडियाबाजी के लिए फटकार लगाई। मामले की अगली सुनवाई अब 30 जुलाई को होगी।
- Written By: गोरक्ष पोफली
एकनाथ शिंदे व उद्धव ठाकरे (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Shiv Sena Case SC Hearing Update: शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह धनुष-बाण को लेकर जारी विवाद में शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में तीखी बहस हुई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेताओं द्वारा न्यायपालिका के विरुद्ध की जा रही बयानबाजी पर तीव्र नाराजगी व्यक्त किया. कोर्ट ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को तय की गई है।
सुनवाई के दौरान जब ठाकरे गुट के वकील देवदत्त कामत ने मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया, तो प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए मीडिया में दिए जा रहे बयानों पर फटकार लगाई। सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक तरफ वकील तारीख मांगते हैं और दूसरी तरफ उनके नेता बाहर जाकर अदालत की छवि खराब करते हैं।
सीजेआई सूर्यकांत का कड़ा बयान
सबसे पहले आप अपने लोगों को मीडिया में जाकर यह गैर-जिम्मेदाराना बयान देने से रोकें कि उच्चतम न्यायालय फैसला नहीं कर रहा है। आप यहां तारीखें मांगते हैं और फिर बाहर कहते हैं कि अदालत मामले का फैसला नहीं कर रही है। हम चेतावनी दे रहे हैं, अपने शब्दों का इस्तेमाल करते समय सावधान रहें। मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो इस तरह के व्यवहार को स्वीकार करेगा।
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अदालत पर है काम का दबाव
सरकारी पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने भी अदालत की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अदालतों पर काम का कितना दबाव है, किसी भी पक्ष के वादी को अदालत के खिलाफ ऐसे बयान देने का अधिकार नहीं है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने भावुक होते हुए कहा, हम यहां शाम 4 बजे तक बैठते हैं, अगर कोई हमें बेकार बैठा समझता है तो यह हमारी समझ से परे है। ठाकरे गुट के वकील कामत ने स्पष्ट किया कि वकील कभी ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करेंगे और वे कोर्ट की सुविधा के अनुसार दलीलें देने को तैयार हैं।
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क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद जून 2022 में शुरू हुआ था जब शिवसेना में एकनाथ शिंदे ने नेतृत्व में 40 विधायकों ने बगावत की थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को ही असली ‘शिवसेना’ मानते हुए धनुष-बाण चिह्न आवंटित कर दिया था और विधानसभा अध्यक्ष ने चुनाव आयोग के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी। आयोग के इसी फैसले को उद्धव ठाकरे ने चुनौती दी है। उद्धव ठाकरे गुट का तर्क है कि पार्टी की मूल पहचान उनसे जुड़ी है। पिछले तीन वर्षों से यह मामला लंबित है और अब कोर्ट ने 30 जुलाई की तारीख तय करते हुए दोनों पक्षों से सहयोग की अपील की है।
