

Somnath Nimbalkar Mumbai Gymnast Story: सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अटूट हौसले और परिवार के निस्वार्थ समर्थन की जरूरत होती है। इस बात को सच कर दिखाया है मुंबई के रहने वाले युवा जिम्नास्ट सोमनाथ निंबालकर और उनके पिता पांडुरंग निंबालकर ने। आर्थिक तंगी, सीमित संसाधनों और खेल के दौरान लगी गंभीर चोटों के बावजूद, सोमनाथ ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और अब उनका एकमात्र लक्ष्य ओलंपिक के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है।
सोमनाथ का जिम्नास्टिक्स का सफर महज पांच वर्ष की उम्र में 25 मीटर की मंकी जंप पूरी करने के साथ शुरू हुआ। शुरुआती प्रशिक्षण के दौरान ही उनके कोच ने उनकी प्राकृतिक प्रतिभा को पहचान लिया और उनके पिता को इस प्रतिभा को सही दिशा देने की सलाह दी।
डिलीवरी पार्टनर के रूप में कार्यरत पांडुरंग निंबालकर ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद यह सुनिश्चित किया कि उनके बेटे की प्रतिभा कभी अवसरों की कमी के कारण पीछे न रह जाए। काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने सोमनाथ को नियमित प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए हरसंभव सहयोग दिया।
सोमनाथ की कड़ी मेहनत उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक ले गई। हालांकि, ग्यारहवीं कक्षा के दौरान लगी चोट के कारण उन्हें एक महत्वपूर्ण प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। इस चुनौती से निराश होने के बजाय उन्होंने और अधिक मेहनत की तथा शानदार वापसी करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक, रजत पदक और कांस्य पदक जीतकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्ष का परिचय दिया।
खेल के साथ-साथ इस परिवार को शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग मिला। इससे सोमनाथ और उनकी बहन दोनों की पढ़ाई का खर्च वहन करने में मदद मिली, जिससे वे अपनी शिक्षा जारी रखते हुए अपने-अपने सपनों को भी आगे बढ़ा सके।
वर्तमान में सोमनाथ विश्वविद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं और जिम्नास्टिक्स में नई उपलब्धियां हासिल करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उनके इस सफर में उनके पिता पांडुरंग हर कदम पर मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। उनका विश्वास, त्याग और निरंतर सहयोग ही वह आधार है, जिसने बचपन के एक छोटे से सपने को ओलंपिक तक पहुंचने की प्रेरणादायक यात्रा में बदल दिया है।
इस परिवार की यात्रा को जोमैटो की डिलीवरी पार्टनर कल्याण पहल का भी सहयोग मिला। इस पहल के तहत सोमनाथ और उनकी बहन की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने सपनों को भी साकार करने की दिशा में आगे बढ़ सके। पांडुरंग निंबालकर का कहना है कि जोमैटो के साथ डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करने की लचीली व्यवस्था ने उन्हें अपने बेटे के प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए आवश्यक समय निकालने में महत्वपूर्ण सहायता दी।
सोमनाथ निंबालकर ने जिम्नास्टिक्स के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई प्रमुख उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2025-26 में महाराष्ट्र राज्य खेल एवं युवा सेवा संचालनालय तथा जिला खेल अधिकारी कार्यालय, नागपुर द्वारा आयोजित 'राज्य स्तरीय स्कूल जिम्नास्टिक्स प्रतियोगिता' के अंडर-19 बालक वर्ग में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में सोमनाथ ने पैरलल बार स्पर्धा में स्वर्ण पदक, पॉमेल हॉर्स में रजत पदक और ऑल-राउंडर वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया।
उनकी इस बेहतरीन लय का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जब उन्होंने पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित सॉल्ट लेक में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित '69वीं राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिता 2025-26' के अंडर-19 बालक वर्ग में हिस्सा लिया। इस राष्ट्रीय मंच पर सोमनाथ ने जिम्नास्टिक्स टीम चैंपियनशिप में रजत पदक जीता और साथ ही वे टीम के सर्वश्रेष्ठ तीन खिलाड़ियों में भी शामिल रहे।
इसके अलावा, बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा प्रायोजित 'मुंबई महापौर कप आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स प्रतियोगिता 2026' में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी, जहां वे टीम चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने में सफल रहे और एक बार फिर टीम के शीर्ष तीन खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई।