ऑटो-टैक्सी चालकों की मराठी अनिवार्यता पर शिवसेना में रार; आमने-सामने आए प्रताप सरनाईक और संजय निरुपम

Pratap Sarnaik vs Sanjay Nirupam: ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता पर प्रताप सरनाईक और संजय निरुपम आमने-सामने। 4 मई से 15 लाख ड्राइवरों की हड़ताल।
Pratap Sarnaik vs Sanjay Nirupam Marathi Issue
Pratap Sarnaik vs Sanjay Nirupam Marathi Issue (फोटो क्रेडिट-X)
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Pratap Sarnaik vs Sanjay Nirupam Marathi Issue: महाराष्ट्र की महायुति सरकार में मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर एक बड़ा आंतरिक विवाद खड़ा हो गया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) से रिक्शा, टैक्सी, ओला और उबर चालकों के लिए मराठी बोलना और उसकी परीक्षा देना अनिवार्य करने के फैसले का उनकी ही पार्टी के नेता संजय निरुपम ने कड़ा विरोध किया है। इस नीतिगत मतभेद ने सरकार के भीतर 'सिर फुटौवल' जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

परिवहन विभाग के नए नियम के अनुसार, अब किसी भी नए लाइसेंस या बैज के लिए चालकों की मराठी भाषा में परीक्षा ली जाएगी। जो चालक परीक्षा में असफल होंगे, उनके लाइसेंस जब्त किए जा सकते हैं। इस फैसले के विरोध में राज्य के लगभग 15 लाख रिक्शा और टैक्सी चालकों ने 4 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है।

संजय निरुपम की सरकार को चेतावनी

शिवसेना नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ने इस फैसले को "अनुचित" करार देते हुए कहा कि इससे चालकों के बीच डर का माहौल है। निरुपम ने तर्क दिया, "यात्रियों से बात करने के लिए बुनियादी मराठी आना ठीक है, लेकिन चालकों से लिखने, पढ़ने और पूर्ण निपुणता की अपेक्षा करना गलत है। अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो हमें अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ेगा।" उन्होंने इस मुद्दे पर व्यक्तिगत रूप से मंत्री सरनाईक से चर्चा करने की बात भी कही है।

गुणरत्न सदावर्ते का कड़ा प्रहार

प्रसिद्ध वकील गुणरत्न सदावर्ते ने भी इस कदम को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि 1 मई 'मजदूर दिवस' है, और इसी दिन मजदूरों (चालकों) के बीच भय का माहौल पैदा करना गैरकानूनी है। सदावर्ते के अनुसार, भाषा संचार का माध्यम है, इसे दमन का हथियार बनाना संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को भाषा के नाम पर प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना नहीं करने दिया जाएगा।

क्या है सरकार की योजना?

दूसरी ओर, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक अपने फैसले पर अडिग नजर आ रहे हैं। सरकार की योजना है कि अमराठी चालकों को मराठी सिखाने के लिए विशेष पाठ्यक्रम चलाया जाए। हालांकि, मुंबई ऑटो रिक्शा मेन्स यूनियन जैसे बड़े संगठनों के हड़ताल पर जाने की घोषणा ने सरकार की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस आंतरिक कलह और संभावित हड़ताल को कैसे सुलझाते हैं।

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