शिंदे ने खुद को बताया टाइगर तो ठाकरे बोले गद्दार, जानें शिवसेना के दो स्थापना दिवस समारोहों में क्या-क्या हुआ?
Shiv Sena Foundation Day: शिवसेना के स्थापना दिवस पर ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच तीखा वार-पलटवार। ऑपरेशन टाइगर से लेकर कंपाउंडर तंज तक, जानें दोनों गुटों के शक्ति प्रदर्शन में क्या-क्या हुआ।
- Written By: गोरक्ष पोफली
उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Shiv Sena Foundation Day Uddhav Thackeray Eknath Shinde Clash: 19 जून, 2026 को शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुंबई में उत्सव से ज्यादा शक्ति प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप की स्पर्धा देखने को मिली। मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर दो विपरीत राजनीतिक ध्रुव सक्रिय थे सायन का षणमुखानंद हॉल जहाँ उद्धव ठाकरे एक घायल टाइगर की तरह दहाड़ रहे थे, और गोरेगांव का नेस्को सेंटर जहां उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एक विजेता के भाव में थे।
ऑपरेशन टाइगर’ बनाम ऑपरेशन गोल्ड
इस जंग की शुरुआत एकनाथ शिंदे के उस मास्टरस्ट्रोक से हुई जिसे उन्होंने ऑपरेशन टाइगर का नाम दिया। शिंदे ने मंच से घोषणा की कि उद्धव गुट के 6 लोकसभा सांसद अब उनके साथ हैं। इस पर कटाक्ष करते हुए उद्धव ठाकरे ने इसे राजनीतिक ऑपरेशन नहीं बल्कि चोरी और डकैती करार दिया। उद्धव ने इसे ऑपरेशन गोल्ड का नाम देते हुए कहा कि जैसे चोर सोने की चोरी को ऑपरेशन कहता है, वैसे ही यह सांसदों की चोरी है।
राउत का 50 करोड़ का प्रहार और शिंदे का कंपाउंडर तंज
संजय राउत ने इस दलबदल को वित्तीय लालच से जोड़ते हुए बड़ा आरोप लगाया कि प्रत्येक सांसद को ₹50 करोड़ का ऑफर दिया गया, जिसमें ₹15 करोड़ एडवांस दिए गए। राउत ने तीखा हमला करते हुए कहा कि जिनके पास कभी रिक्शा चलाने के पैसे नहीं थे, वे आज प्राइवेट जेट में घूम रहे हैं। इसके जवाब में शिंदे ने राउत को कंपाउंडर कहते हुए तंज कसा कि जो खुद कंपाउंडर है, वह क्या राजनीतिक ऑपरेशन करेगा?
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शोले का स्टाइल और बांझपन का आरोप
एकनाथ शिंदे ने फिल्मी अंदाज अपनाते हुए शोले के जेलर (असरानी) का जिक्र किया और कहा, हालत वैसी है कि आधे इधर जाओ, आधे उधर… और जब पीछे मुड़कर देखा तो उद्धव जी के पीछे कोई नहीं बचा।
दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सबसे कड़ा हमला बोला। उन्होंने भाजपा की कार्यशैली को भस्म्या रोग (मिटने न वाली भूख) बताया और सवाल किया कि क्या आपके संगठन में बांझपन आ गया है जो आप दूसरों के बच्चे (नेता) चुरा रहे हैं? उन्होंने भाजपा के हिंदुत्व को गोमूत्रधारी भोंदुत्व और मिलावटी करार दिया।
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पद छोड़ने की शर्त और असली शेर की दावेदारी
जंग के अंत में, उद्धव ठाकरे ने भावनात्मक दांव खेलते हुए कहा कि यदि शिवसैनिकों को उन पर अविश्वास है तो वे पद छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन वह अपनी शिवसेना किसी गद्दार के हाथ में नहीं सौंपेंगे। वहीं शिंदे ने अपने बेटे श्रीकांत शिंदे को असली शेर बताते हुए अपनी विरासत पर दावा ठोक दिया। कुल मिलाकर, यह स्थापना दिवस वैचारिक विमर्श के बजाय चोर, गद्दार, कंपाउंडर और भस्म्या जैसे शब्दों के युद्ध का मैदान बन गया।
