आसान भाषा में समझें शिंदे और पवार का खेला, शिवसेना और एनसीपी के अलग गठबंधन का क्या है मतलब?

Shiv Sena NCP Alliance: बीएमसी में एकनाथ शिंदे और एनसीपी गुटों ने बनाया नया गठबंधन। समितियों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी का कद घटेगा, जबकि महायुति की पकड़ मजबूत होगी।
Eknath Shinde Sharad Pawar Shiv Sena NCP Alliance Mumbai
Eknath Shinde Sharad Pawar Shiv Sena NCP Alliance Mumbai (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Shiv Sena UBT vs Shinde Sena: मुंबई की राजनीति में 'चाणक्य नीति' का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। बीएमसी (BMC) मेयर चुनाव से ठीक पहले एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों (अजित और शरद पवार) ने हाथ मिलाकर एक नया 'ग्रुप' बना लिया है। यह गठबंधन सुनने में जितना चौंकाने वाला है, इसके पीछे का गणित उतना ही गहरा है। सरल भाषा में कहें तो, यह उद्धव ठाकरे (Shiv Sena UBT) को बीएमसी की महत्वपूर्ण समितियों में कमजोर करने और अपनी ताकत बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है।

इस नए समीकरण से अब बीएमसी की सत्ता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने वाला है।

क्या है शिंदे-पवार का नया 'खेला'?

तकनीकी रूप से, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने एनसीपी के दोनों गुटों के साथ मिलकर कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय में एक 'संयुक्त समूह' (Combined Group) के रूप में पंजीकरण कराया है।

नया नंबर गेम: शिवसेना के पास 29 सीटें थीं, जिनमें एनसीपी (अजित गुट) की 3 और शरद पवार गुट की 1 सीट जुड़ गई। अब यह समूह 33 पार्षदों का हो गया है।

रणनीति: हालांकि चुनाव बीजेपी और शिंदे सेना ने साथ लड़ा था, लेकिन सदन के भीतर उन्होंने खुद को अलग-अलग दलों के रूप में रजिस्टर किया है। इससे वैधानिक समितियों (Statutory Committees) में उनकी सीटों का कोटा बढ़ जाएगा।

समितियों पर कब्जा: यूबीटी को बड़ा झटका

बीएमसी में सबसे शक्तिशाली स्थायी समिति (Standing Committee) होती है, जो शहर के खजाने और बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देती है।

सीटों का गणित: पहले समितियों में शिवसेना यूबीटी के पास 8 सीटें होने वाली थीं, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर 7 रह जाएगी। वहीं, शिंदे-एनसीपी गठबंधन की सीटें 3 से बढ़कर 4 हो जाएंगी।

विपक्ष कमजोर: कांग्रेस और यूबीटी का गठबंधन अब समितियों में भाजपा-शिंदे गठबंधन को 'एकतरफा' फैसले लेने से रोकने में मुश्किल महसूस करेगा।

मनोनीत पार्षद: इस नए गठबंधन से MNS और AIMIM को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। अब वे अपना एक भी मनोनीत पार्षद (Nominated Councillor) सदन में नहीं भेज पाएंगे, क्योंकि उनका कोटा अब शिंदे-पवार गुट के पास चला जाएगा।

अमेया घोले: नए गठबंधन के सारथी

दादर से पार्षद अमेया घोले को इस नए संयुक्त समूह का नेता नियुक्त किया गया है। घोले ने स्पष्ट किया कि भले ही उन्होंने एनसीपी के साथ गठबंधन किया है, लेकिन वे 'महायुति' (बीजेपी के साथ) का हिस्सा बने रहेंगे। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बीएमसी की सुधार समिति और स्थायी समिति जैसे वित्तीय निकायों पर पकड़ मजबूत करना है। यह कदम दर्शाता है कि शिंदे और पवार गुटों ने आपसी मतभेद भुलाकर मुंबई की तिजोरी की चाबी (BMC Budget) पर नियंत्रण पाने के लिए हाथ मिलाया है, जिससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले विपक्ष के लिए राहें और कठिन हो गई हैं।

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