

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले, शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार के खिलाफ एक ‘‘आरोपपत्र'' प्रस्तुत किया है। इस आरोपपत्र में राज्य से उद्योगों के पलायन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को गंभीरता से उठाया गया है। शरद पवार के नेतृत्व में एनसीपी ने महाराष्ट्र की आर्थिक गिरावट, उद्योगों के पलायन और महिला सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक नया अभियान शुरू किया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल की अगुवाई में पार्टी नेताओं ने मंत्रालय के पास महात्मा गांधी की प्रतिमा से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा तक मार्च किया और बाद में दक्षिण मुंबई के हुतात्मा चौक तक पैदल यात्रा की। जयंत पाटिल ने बताया कि अभियान का नाम ‘‘हक्क मागतोय महाराष्ट्र'' (हक मांग रहा महाराष्ट्र) है, जिसमें विभिन्न मीडिया पर विज्ञापनों और एक नए गाने का भी समावेश होगा। पहला विज्ञापन बढ़ती बेरोजगारी और प्रमुख परियोजनाओं के गुजरात में स्थानांतरित होने पर केंद्रित होगा।
शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में भाजपा और उसकी सहयोगियों पार्टियों ने प्रमुख समाज सुधारकों छत्रपति शिवाजी महाराज, ज्योतिबा फुले, बाबा साहब आंबेडकर और ज्योतिबा शाहू की विचारधारा को कमजोर किया है। उन्होंने किसानों की परेशानियों और महंगाई के मुद्दे को उठाया, साथ ही यह भी कहा कि महाराष्ट्र को केंद्रीय बजट में उचित हिस्सेदारी नहीं मिली है।
जयंत पाटिल ने भाजपा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निर्भरता को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि यह चुनावों के बाद महाराष्ट्र में सरकार में बदलाव का संकेत है। उन्होंने भाजपा द्वारा देशी गायों को राज्यमाता घोषित करने के फैसले पर भी सवाल उठाया, यह पूछते हुए कि क्या इससे गोमांस निर्यातकों को चुनावी बॉण्ड के जरिए धन मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जयंत पाटिल ने कहा कि गडकरी की टिप्पणियां राज्य की वित्तीय स्थिति को सही बता सकती हैं। पाटिल ने कहा कि लाडकी बहिन याेजना अन्य योजनाओं की सब्सिटी को प्रभावित करेगी। जिससे लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। पाटिल ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता गडकरी हमेशा स्पष्ट बातें करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी बातों से यह प्रतीत हो रहा है कि राज्य की वित्तीय स्थिति सही नहीं हैं।