अमित शाह पर पवार का ‘महाप्रहार’, पहले ‘तड़ीपार’ गृहमंत्री, बोले- अपने पद की गरिमा बनाएं रखें
हाल ही में शिरडी में आयोजित बीजेपी के दो दिवसीय अधिवेशन में अमित शाह ने शरद पवार और उनकी पार्टी पर कटाक्ष किया था, जिसका जवाब उन्हें शरद पवार की ओर से मिला है। पवार ने जवाब में शाह को अपने पद का ध्यान रखने को कहा है।
- Written By: प्रिया जैस
शरद पवार और अमित शाह (कंसेप्ट फोटो, सोशल मीडिया)
मुंबई: देश में कई गृह मंत्री रहे, लेकिन किसी को तड़ीपार नहीं किया गया था। अमित शाह ऐसे पहले गृह मंत्री हैं, जिन्हें गुजरात से तड़ीपार किया गया था। गृहमंत्री अमित शाह पर यह महा प्रहार राकां अध्यक्ष शरद पवार ने किया है। उन्होंने मंगलवार को को में मुंबई के एक प्रेस कांफ्रेंस में शाह द्वारा शिडों में बीजेपी के सम्मेलन में किए गए हमलों का करारा जवाब दिया।
हालांकि, मंगलवार का दिन मकर संक्रांति का था। इस मौके पर गुड़ तिल खा कर मीठी बातें कहने की बात कही जाती है। लेकिन पवार ने शाह को जम कर खरी खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के अलावा पंडित गोविंद वल्लभ पंत, यशवंतराव चव्हाण व शंकरराव चव्हाण समेत कई और नेता भी देश के गृह मंत्री बने।
पद की मर्यादा ध्यान रखे
इन सभी नेताओं ने इस पद की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया। इन नेताओं में से किसी को उनके राज्य से तड़ीपार नहीं किया गया। लेकिन जिस तरह से वर्तमान में गृह मंत्री अमित शाह बयान दे रहे हैं। उन्हें यह शोभा नहीं देता है। शाह को गृह मंत्री पद की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
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अमित शाह को 2010 में सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले में दो साल के लिए राज्य से तड़ीपार कर दिया गया था। बाद में उन्हें 2014 में इस मामले में बरी कर दिया गया था।
बाल ठाकरे से मांगा था सहयोग
पवार ने केंद्रीय गृह मंत्री शाह पर तंज कसते हुए कहा कि आज बीजेपी नेता उद्धव ठाकरे पर निशाना साध रहे हैं। इस पर उद्धव प्रतिक्रिया देंगे। लेकिन मुझे यह पता है कि जब ये सज्जन (अमित शाह) गुजरात में नहीं रह सके, तो उन्हें मुंबई ने सहारा दिया था। उस समय बीजेपी के इस नेता ने बालासाहेब ठाकरे से उनके घर जाकर सहयोग करने का अनुरोध किया था। मुझे लगता है कि उद्धव ठाकरे इस बारे में मुझसे ज्यादा जानकारी दे सकते हैं। राकां अध्यक्ष ने कहा कि शाह के बयान को देखते हुए ऐसा लगता है कि राजनीति का स्तर कितना गिर गया है।
शाह को पूरी जानकारी नहीं
पवार ने शाह को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें बिना जानकारी के बयान नहीं देना बाहिए। में 1978 में जब महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री था, उस समय जनसंघ के नेता उत्तमराव पाटिल, हशु आडवाणी, प्रमिलाताई जैसे सिद्धहस्त लोग मेरे मंत्रिमंडल में थे। जनसंघ पृष्ठभूमि वाले लोगों ने मेरे साथ काम किया है। वसंतराव भागवत और प्रमोद महाजन उन लोगों में से थे जिन्होंने टीम में रहकर हमारा समर्थन किया।
देश में अलग-अलग पार्टियां सत्ता में रहीं। लेकिन राजनीतिक दल के नेताओं के बीच सामंजस्य था। पवार ने उदाहरण देने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का नाम लिया। उन्होंने कहा कि ये निपुण लोग थे। जब भुज में भूकंप आया था तो पीएम वाजपेयी ने बैठक बुलाई, इसमें अतिवृष्टि, वाद व भूकंप नीति तय करने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई। जबकि उस समय मैं विपक्षी में था।
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बीजेपी विपक्षी दल नेताओं की यही पृष्ठभूमि है लेकिन हाल ही में गृह मंत्री ने जो भाषण दिया। इस भाषण में मेरे और उद्धव ठाकरे पर जिस तरह से टिप्पणी की, उसके बारे में बात न करना ही बेहतर है।
विश्वासघात की राजनीति के जनक हैं पवार: शेलार
विश्वासघात की राजनीति के असली जनक शरद पवार हैं यही वजह है कि विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र की जनता ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया है। यह पलटवार अमित शाह की तरफ से मुंबई बीजेपी अध्यक्ष आशीष शेलार ने किया है। महाराष्ट्र के मतदाताओं ने पवार की विश्वासघात की राजनीति की वजह से उन्हें अपनी जगह दिखा दी है। पवार ने यह स्वीकार किया कि वे जनसंघ के बल पर मुख्यमंत्री बने थे।
