Maharashtra School Bus Safety Rules: स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र में नियमों की स्पष्टता और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। महाराष्ट्र स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल गर्ग ने आरोप लगाया है कि नियम बनाने वालों को ही कई प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसके चलते परिवहन विभाग के अधिकारी अपनी-अपनी व्याख्या के अनुसार नियम लागू कर रहे हैं।
अनिल गर्ग के मुताबिक, स्कूल बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र से लेकर बसों में लगाए जाने वाले सुरक्षा उपकरणों तक को लेकर अलग-अलग आरटीओ कार्यालयों की राय अलग है। इससे स्कूल बस संचालकों और चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि एक ही नियम की अलग-अलग व्याख्या होने से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
गर्ग ने दावा किया कि वर्ष 2011 से अब तक स्कूल बसों से जुड़े सुरक्षा नियमों में करीब 20 बार बदलाव किया जा चुका है। उनका आरोप है कि हर बार मंत्री बदलने के साथ सुरक्षा नियमों में भी बदलाव कर दिए जाते हैं। इससे स्कूल बस संचालकों के लिए लगातार नए नियमों का पालन करना मुश्किल हो जाता है।
एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि बार-बार नए नियम लागू करने के बजाय मौजूदा नियमों को स्पष्ट और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, नियम ऐसे होने चाहिए जिन्हें परिवहन विभाग के सभी अधिकारी एक समान तरीके से लागू करें और बस संचालकों को भी उनके पालन में परेशानी न हो।
अनिल गर्ग ने आरोप लगाया कि सुरक्षा नियमों में बार-बार होने वाले बदलावों का फायदा बस निर्माताओं को पहुंचता है। नए उपकरण और तकनीकी बदलाव लागू होने के कारण बसों की लागत बढ़ती है, जिसका असर अंततः स्कूल बसों के किराये पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस वजह से अभिभावकों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
गर्ग के अनुसार, स्कूल बस सुरक्षा नियमों से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दों को अदालत के समक्ष रखा जा चुका है। मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होने वाली है। एसोसिएशन को उम्मीद है कि सुनवाई के दौरान नियमों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।
स्कूल बसों में सीट बेल्ट के प्रावधान को लेकर भी अनिल गर्ग ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सुरक्षा नियम लागू करते समय उनकी व्यावहारिकता और जमीनी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ बस संचालकों के लिए नियमों का पालन भी स्पष्ट और संभव हो।