

SC Strict On Commercial Use Of Residential Properties: सुप्रीम कोर्ट के एक नए आदेश से देश भर के उन करोड़ों कारोबारियों में एक नई चिंता व्याप्त हो गयी है, जो रिहायशी इलाकों में व्यवसाय कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश भर के नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन रिहायशी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दें, जिनका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्य से किया जा रहा है।
अगर कोई उल्लंघन पाया जाता है तो उन्हें सील कर दें। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन क्षेत्रों का किसी विशेष उपयोग (रिहायशी या व्यावसायिक) के लिए स्पष्ट रूप से निर्धारण नहीं किया गया है, उन पर भी गौर किया जाएगा, लेकिन फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। पीठ ने कहा, 'हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि सभी अधिकारी यह काम बिना किसी भेदभाव के करेंगे। अगर वे 'पिक एंड चूज' (अपनी पसंद से चुनने) का तरीका अपनाते हैं तो अदालत इस मामले में सख्त रुख अपनाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस नए आदेश पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। भारत में तो रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीदी पड़ोस के दुकानदार से करने का प्रचलन हमेशा से रहा है। देश भर में सभी जगह पर रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां कई वर्षों से बदस्तूर जारी है।
कई जगह पर नगर निगम ने व्यावसायिक कर लगाया है, जल आपूर्ति विभाग ने व्यावसायिक जल कनेक्शन दिया है और तो और बिजली विभाग द्वारा व्यावसायिक बिजली कनेक्शन दिया गया है, ऐसे में अचानक इस प्रकार के आदेश के चलते करोड़ों कारोबारियों को अपने वर्षों से जमाये हुए व्यवसाय से हाथ धोना पड़ सकता है।
इससे जहां व्यापारियों को भारी नुकसान होगा, वहीं बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसलिए केंद्र सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के संबंध में अपील करनी चाहिए या फिर व्यापारियों को विस्थापित करने और मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़ी एक याचिका का दायरा बढ़ाते हुए यह आदेश दिया और देशभर में इस तरह के मामले पर गौर करने का फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले बिल्डिंग बाय-लाज और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों का बड़े पैमाने पर खुलेआम उल्लंघन किए जाने के मामले का संज्ञान लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मानदंडों और नियमों का खुलेआम उल्लंघन करके अक्सर निर्माण कार्य किए जाते हैं, जिनमें निषिद्ध क्षेत्र भी शामिल हैं। न्यायालय ने कहा था, 'सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि काम पूरा होने के बाद ऐसी जमीनों और इमारतों का इस्तेमाल अक्सर उस काम के अलावा दूसरे काम में होता है, जिसके लिए सक्षम अधिकारी से मूल रूप से मंजूरी मिली होती है।'