Sanjay Shirsat ने गुवाहाटी की दास्तान सुनाई, बोले – होटल की छत से कूदना चाहते थे कल्याणकर
Sanjay Shirsat ने 20 जून 2022 की शिवसेना बगावत में विधायक बालाजी कल्याणकर के भय और गुवाहाटी दौरे से जुड़ा चौंकाने वाला किस्सा सार्वजनिक किया। उन्होंने बताया कि कल्याणकर छत से कूदने के लिए तैयार थे।
- Written By: अपूर्वा नायक
संजय शिरसाट और बालाजी कल्याणकर (सौ. सोशल मीडिया )
Sanjay Shirsat On Balaji Kalyankar: उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के शिवसेना के नेता और राज्य के कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट ने 20 जून 2022 को शिवसेना में हुई ऐतिहासिक बगावत के संबंध में दिलचस्प खुलासा किया है।
मंत्री शिरसाट का दावा है कि बगावत के समय शिंदे का साथ देनेवाले शिवसेना विधायकों में शामिल विधायक बालाजी कल्याणकर बेहद डरे हुए थे। उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था और वह होटल की छत से कूदने तक को तैयार थे। इस वजह से शिंदे ने दो विधायकों को कल्याणकर की निगरानी करने का निर्देश दिया था।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्वावाली महाविकास आघाडी सरकार के दौरान वर्तमान शिवसेना का नेतृत्व कर रहे एकनाथ शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ सीधे सूरत पहुंच गए थे। बाद में सभी लोग वहां से गुवाहाटी गए थे।
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मंत्री शिरसाट का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधायक कल्याणकर बेहद डरे हुए थे। नांदेड़ में पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी को धन उपलब्ध कराने की वजह से आंबेडकरवादी समुदाय ने मंत्री शिरसाट का सत्कार किया। इस अभिनंदन समारोह के दौरान शिरसाट ने बगावत के बाद गुवाहाटी दोरे का एक किस्सा उपस्थित लोगों को सुनाया। उन्होंने कहा कि मैं लगभग पिछले 42 वर्षों से राजनीति में हूं। यह मेरे जीवन की तीसरी बगावत थी।
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क्या थी MLA के डर की वजह?
कल्याणकर को चिता थी कि कही दल बदल कानून के तहत उनका विधायक का पद रद्द न हो जाए। निर्वाचन क्षेत्र में लोग क्या सोचेंगे? इस वजह से वह तनाव में थे। एक बार उन्होंने कहा कि वह होटल से कूद जाएंगे। इससे हम भी चिंतित हो गए थे। क्योंकि बगावत के समय हर विधायक का अपना महत्व था, दल बदल कानून के तहत एक भी विधायक कम होता तो हम सभी का विधायक का दर्जा रद्द हो जाता। इसलिए हमने बालाजी को समझाया कि यदि आप नहीं खाएंगे, तो भी आप मर जाएंगे, हमने उनसे कहा कि कल्याणकर हमने अपनी राजनीति को दांव पर लगाया है। कल कुछ भला-बुरा हुआ तो हम सभी डायरेक्ट वॉश आऊट हो जाएंगे। आप नए हो आपको माफी मिल जाएगी, लेकिन हिम्मत किए बगैर कुछ भी नहीं मिलता है।
