

Sanjay Raut Welcomes Amruta Fadnavis Statement: गरबा और डांडिया आयोजनों में गैर-हिंदुओं, विशेषकर मुसलमानों के प्रवेश को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में घमासान छिड़ गया है। विश्व हिंदू परिषद द्वारा गरबा पंडालों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग और भाजपा नेता व कैबिनेट मंत्री नितेश राणे द्वारा इसका समर्थन किए जाने के बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के बयान ने इस मुद्दे को एक नया मोड़ दे दिया है।
गरबा में मुस्लिम समुदाय के प्रवेश को लेकर छिड़ी बहस पर अमृता फडणवीस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि त्योहार सभी को साथ लेकर चलने के लिए होते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि किसी भी धर्म या समुदाय का व्यक्ति गरबा देखने आता है और सही तरीके से बिना Chaos उत्पन्न किए त्योहार का आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कुछ भी गलत या आपत्तिजनक नहीं लगता।
शिवसेना ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने अमृता फडणवीस के इस बयान का समर्थन और स्वागत किया है। नागपुर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा कि वह मिलकर त्योहार मनाने और मुस्लिम महिलाओं को गरबा में भाग लेने की अनुमति देने संबंधी अमृता फडणवीस के रुख का स्वागत करते हैं।
हालांकि, इस सराहना के तुरंत बाद राउत ने राजनीतिक चुटकी लेते हुए कहा कि अमृता फडणवीस को यह सलाह केवल सार्वजनिक रूप से देने के बजाय अपनों को भी देनी चाहिए। राउत ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके प्रिय नव-हिंदुत्ववादी समर्थकों"को भी ऐसी सलाह देनी चाहिए। माना जा रहा है कि राउत का इशारा सीधे तौर पर कैबिनेट मंत्री नितेश राणे की तरफ था।
विश्व हिंदू परिषद ने आगामी नवरात्रि उत्सव के दौरान राज्य में गरबा आयोजनों में मुसलमानों को प्रवेश न देने की घोषणा की थी। राज्य के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने वीएचपी के इस रुख का समर्थन करते हुए दावा किया था कि ऐसे त्योहारों के दौरान लव जिहाद के मामले बढ़ते हैं।
इसके साथ ही राणे ने तर्क दिया था कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते, उन्हें हिंदू धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं होना चाहिए।
नितेश राणे की टिप्पणियों का जवाब देते हुए संजय राउत ने मुस्लिम समुदाय के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। राउत ने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से लेकर देश की आजादी की लड़ाई तक कई महत्वपूर्ण संघर्षों में योगदान दिया है।
उन्होंने लोकशाहीर कवि अमर शेख का उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के गठन के लिए कई मुस्लिम दिग्गजों ने भी अपना सर्वस्व न्योछावर किया था।