Sanjay Raut on Devendra Fadnavis (फोटो क्रेडिट-X)
Leader of Opposition Dispute: महाराष्ट्र की राजनीति में आज से शुरू हुआ बजट सत्र एक ऐतिहासिक और विवादित मोड़ ले चुका है। विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों में ‘नेता प्रतिपक्ष’ (LoP) का पद रिक्त होने के कारण महा विकास आघाड़ी (MVA) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महायुति सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इसे ‘संविधान का मजाक’ करार दिया है। राउत ने आरोप लगाया कि सरकार अपने बहुमत के अहंकार में लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों की गरिमा को खत्म कर रही है।
संजय राउत ने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष के नेता की भूमिका ‘चेक एंड बैलेंस’ बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। उनके अनुसार, बिना विपक्ष के नेता के सदन की कार्यवाही चलाना न केवल अनैतिक है, बल्कि पूरी तरह से असंवैधानिक भी है। राउत ने पूछा कि जब सरकार के पास इतना प्रचंड बहुमत है, तो वह एक विपक्षी नेता का सामना करने से क्यों डर रही है?
संजय राउत ने संवैधानिक ढांचे का हवाला देते हुए कहा कि लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों की विधानसभाओं में नेता प्रतिपक्ष का पद कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक अनिवार्यता है। उन्होंने कहा, “बिना नेता प्रतिपक्ष के किसी भी सदन को चलाना लोकतंत्र का मखौल उड़ाना है। आप संविधान की बात तो करते हैं, लेकिन महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में विपक्ष की आवाज को असंवैधानिक रूप से दबाया जा रहा है।” राउत का मानना है कि विपक्ष के बिना सरकार की जवाबदेही तय नहीं की जा सकती, जिससे सत्ता निरंकुश होने का खतरा बढ़ जाता है।
ये भी पढ़ें- दरिंदा बना मंदिर का पुजारी, 13 साल की बच्ची को बनाया हवस का शिकार, पॉक्सो के तहत मामला दर्ज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महायुति सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सत्रों से विपक्ष लगातार इस पद की मांग कर रहा है, लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देकर इसे टाला जा रहा है। राउत ने सवाल किया, “आखिर बीजेपी के मन में इतना डर क्यों है? आपके पास संख्या बल है, फिर भी आप सदन में एक आधिकारिक विपक्षी नेता को जगह देने से कतरा रहे हैं।” उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मानदंडों का हनन बताया और आरोप लगाया कि सरकार संस्थागत नियंत्रण से बचना चाहती है।
यह संभवतः महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार है जब बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय पर दोनों सदनों में कोई नेता प्रतिपक्ष मौजूद नहीं है। जानकारों का कहना है कि विपक्ष द्वारा आवश्यक न्यूनतम सदस्य संख्या (10%) न जुटा पाने के कारण यह गतिरोध पैदा हुआ है। हालांकि, संजय राउत ने इसे सरकार की सोची-समझी साजिश बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संवैधानिक पदों की इसी तरह अनदेखी की गई, तो जनता के बीच सरकार की छवि एक ‘दमनकारी सत्ता’ के रूप में बनेगी। एमवीए अब इस मुद्दे को लेकर कानूनी विकल्प तलाशने और जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।