

Sanjay Raut On PM Modi Lok Sabha Speech: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में गहराते युद्ध के संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में दिए गए वक्तव्य पर राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री के भाषण और उनकी कार्यशैली पर तीखा पलटवार किया है। राउत ने न केवल सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए, बल्कि प्रधानमंत्री की 'बॉडी लैंग्वेज' को लेकर भी विवादित टिप्पणी की है।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने शांति और विकास की बातों को केवल शब्दों तक सीमित कर दिया है, जबकि धरातल पर स्थिति इसके उलट है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर कि "भारत शांति के साथ खड़ा है", संजय राउत ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, "लगता तो नहीं है कि आप शांति के साथ खड़े हैं। यह शांति और विकास आपने कहां छुपाकर रखा है, हमें भी बताइए।" राउत ने प्रधानमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि शांति और कूटनीति क्या होती है, यह समझने के लिए उन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के चरित्र और इतिहास को पढ़ना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावा कर रही है।
23 मार्च को प्रधानमंत्री के सदन में आने और भाषण देने के बाद संजय राउत ने उनके व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए कहा, "युद्ध शुरू होने के 25 दिन बाद पीएम मोदी सदन में आए। हमने उनकी बॉडी लैंग्वेज और बोलने के ढंग को ऑब्जर्व किया, तो लगा कि वे डिप्रेशन (अवसाद) में हैं। उनका खुद पर से नियंत्रण छूट गया है।" राउत ने आगे दावा किया कि मोदी की अब ज्यादा दिन सत्ता में रहने की मानसिकता नहीं दिखती और वे खुद ही पद छोड़ देंगे।
संजय राउत ने राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री संसद में बहस (Debate) से बच रहे हैं। राउत ने पूछा, "जब देश और दुनिया के सामने इतनी बड़ी समस्या है, तो प्रधानमंत्री सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाते? कोरोना के समय हमने थालियां और तालियां बजाई थीं, इस बार युद्ध के संकट और बढ़ती महंगाई के बीच हमें क्या बजाना है? क्या अब सिलेंडर बजाना पड़ेगा?" उन्होंने मांग की कि विपक्ष के मन में जो सवाल हैं, उनका जवाब प्रधानमंत्री को सीधे बहस के जरिए देना चाहिए।