मराठी अनिवार्यता पर मंत्रालय में बड़ी बैठक; संजय निरुपम ने 'परीक्षा' के प्रावधान को बताया अनुचित

Sanjay Nirupam Marathi Language Row: मराठी भाषा अनिवार्यता पर मंत्रालय में आज अहम बैठक। संजय निरुपम ने ऑटो चालकों की मराठी परीक्षा और परमिट रद्द करने के नियम का किया विरोध।
Sanjay Nirupam on Marathi Language Rule
Sanjay Nirupam on Marathi Language Rule (फोटो क्रेडिट-X)
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Sanjay Nirupam on Marathi Language Rule: मुंबई में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता के नियम को लेकर आज मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) से लागू होने वाले इस नियम पर शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय निरुपम ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। निरुपम का मानना है कि भाषा को संवाद का माध्यम होना चाहिए, न कि किसी पर थोपा जाने वाला दंडात्मक हथियार।

संजय निरुपम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि उन्हें स्थानीय भाषा में संवाद होने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार का जो 'परीक्षा' और 'परमिट रद्द' करने का प्रावधान है, वह पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने तर्क दिया कि मुंबई में काम करने वाले अधिकांश ऑटो चालकों ने बैंक से ऋण (Loan) ले रखा है; यदि परीक्षा में असफल होने पर उनका लाइसेंस जब्त या परमिट रद्द कर दिया गया, तो उनकी आजीविका संकट में पड़ जाएगी।

"दबाव से नहीं सीखी जाती भाषा"

निरुपम ने मार्मिक टिप्पणी करते हुए कहा, "भाषा प्रेम और संचार का विषय है। इसे किसी शिकारी की तरह दबाव डालकर नहीं सिखाया जा सकता। मुंबई में लोग हिंदी बोलकर अपना काम बखूबी कर रहे हैं।" उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह नियम केवल गरीबों के लिए है, तो इसे कॉरपोरेट जगत और बड़े बैंकों में काम करने वाले अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू क्यों नहीं किया जाता?

सरकार के सामने रखेंगे नया प्रस्ताव

आज होने वाली बैठक में संजय निरुपम सरकार के समक्ष एक अनुरोध पत्र (Request Letter) पेश करेंगे। उनके प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

प्रशिक्षण शिविर: ड्राइवरों को दंडित करने के बजाय सरकार को मराठी भाषा सिखाने के लिए बुनियादी प्रशिक्षण शिविर शुरू करने चाहिए।

समय सीमा: भाषा सीखने की प्रक्रिया के लिए कम से कम 6 महीने से एक वर्ष की अवधि निर्धारित की जानी चाहिए।

सॉफ्ट अप्रोच: परमिट रद्द करने जैसे कठोर कदम उठाने के बजाय प्रोत्साहन आधारित नीति अपनाई जाए।

परिवहन मंत्री के साथ होने वाली इस चर्चा में यह तय होगा कि क्या सरकार 1 मई की समय सीमा को आगे बढ़ाएगी या नियमों में ढील देगी। निरुपम ने आशा व्यक्त की है कि सरकार मानवीय आधार पर उनके अनुरोध को स्वीकार करेगी ताकि किसी भी मेहनतकश चालक को असुविधा न हो।

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