1000 एकड़ वन जमीन निजी कब्जे से मुक्त! राजस्व मंत्री बावनकुले का बड़ा फैसला, वनमंत्री गणेश नाईक ने किया स्वागत
Chandrashekhar Bawankule Decision: संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की 1053 एकड़ वन भूमि निजी कब्जे से मुक्त। बावनकुले ने पुराने आदेश रद्द कर जमीन को 'रिजर्व फॉरेस्ट' में रखा, गणेश नाईक ने किया स्वागत।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: गोरक्ष पोफली
चंद्रशेखर बावनकुले और गणेश नाईक (सोर्स: नवभारत फोटो)
1000 Acre Forest Land Saved: महाराष्ट्र सरकार ने घोडबंदर रोड पर स्थित संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की करीब 1053 एकड़ वनजमीन को निजी कब्जे में जाने से बचा लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अंतिम आदेश जारी कर भाईंदरपाडा-ओवला की इस जमीन पर ‘महाराष्ट्र शासन राखीव वने’ और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की नोंद सातबारा उतारे पर कायम रखने का निर्देश दिया है।
राजस्व मंत्री के इस फैसले से संबंधित वनक्षेत्र अब निजी हस्तांतरण से सुरक्षित रहेगा और उस पर होने वाले अनियंत्रित विकास व बड़े निर्माणों पर रोक लगेगी।
हरित पट्टा और वनक्षेत्र अबाधित
वनमंत्री गणेश नाईक ने इस निर्णय के लिए बावनकुले का अभिनंदन किया। बावनकुले ने कहा कि “वन की जमीन वन के पास ही रहनी चाहिए” यह राज्य सरकार की स्पष्ट भूमिका है। इस आदेश से राष्ट्रीय उद्यान से सटा महत्वपूर्ण हरित पट्टा और वनक्षेत्र अबाधित रहेगा।
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क्या था मामला
महसूल न्यायालय के आदेश के अनुसार घोडबंदर मार्ग स्थित भाईंदरपाडा-ओवला की पुरानी सर्वे क्र. 291 और 297 की कुल 1,053 एकड़ जमीन 1975 से वन विभाग के कब्जे में है। सातबारा पर इसकी नोंद ‘महाराष्ट्र शासन राखीव वने’ के रूप में थी।
लेकिन कोकण विभाग के अपर आयुक्त के 11 जनवरी 2019 के आदेश और महसूल न्यायालय के 31 दिसंबर 2025 के आदेश के बाद इस जमीन पर निजी खातेदारों संदीप रतनलाल माखेचा व अन्य के नाम की फेरफार नोंद क्रमांक 975 कायम हो गई थी। इससे जमीन के निजी हाथों में जाने का रास्ता खुल गया था।
जिलाधिकारी से जांच
मामले की गंभीरता देखते हुए राजस्व मंत्री बावनकुले ने ठाणे जिलाधिकारी से जांच कराई। जिलाधिकारी की रिपोर्ट और महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता 1966 के कलम 258 के तहत पुनर्विलोकन अर्जी पर सुनवाई के बाद बावनकुले ने 31 दिसंबर 2025 और 11 जनवरी 2019 के दोनों आदेश रद्द कर दिए। साथ ही उपविभागीय अधिकारी ठाणे के 1 अगस्त 2015 और अपर जिलाधिकारी ठाणे के 21 मार्च 2017 के आदेश को कायम रखा।
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जमीन वर्ग-2 में
नतीजतन निजी खातेदारों के नाम की फेरफार नोंद 975 रद्द कर दी गई। अब सातबारा पर ‘महाराष्ट्र सरकार रिजर्व फॉरेस्ट’ और संजय गांधी नेशनल पार्क का रिकॉर्ड बरकरार रखते हुए जमीन को वर्ग-2 में रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के टी.एन. गोदावरमन मामले में दी गई वन की व्यापक परिभाषा को आधार बनाते हुए यह सिद्ध हुआ कि मौके पर वन मौजूद है और जमीन राष्ट्रीय उद्यान के प्रबंधन में है।
अदालत ने ठाणे जिलाधिकारी को 3 महीने में गहन जांच कर वन विभाग को रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए हैं। राजस्व मंत्री बावनकुले ने स्पष्ट किया कि “संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की जमीन निजी लोगों के कब्जे में जाने की खबरें तथ्यहीन थीं। सरकार का उद्देश्य कभी भी वनजमीन निजी लोगों को देना नहीं था।”
