पुरंदर एयरपोर्ट भूमि अधिग्रहण: सहमति पत्र जमा करने की मियाद 16 अगस्त तक बढ़ी, 92% किसान हुए तैयार

Purandar Airport News: पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए सहमति पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। जिला प्रशासन अब तक 2,600 करोड़ रुपये का मुआवजा बांट चुका है।
Purandar Airport Land Acquisition: Deadline for submitting consent letters extended to August 16
पुरंदर एयरपोर्ट भूमि अधिग्रहणसोर्स: सोशल मडिया
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Purandar Airport Land Acquisition: पुणे पुरंदर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने के उद्देश्य से पुणे जिला प्रशासन ने किसानों को एक और राहत देते हुए सहमति पत्र एवं शपथ पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त तक बढ़ा दी है। प्रशासन के अनुसार अब तक लगभग 92 प्रतिशत किसानों ने अपनी भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति दे दी है। कुछ किसानों के व्यक्तिगत, पारिवारिक तथा दस्तावेजी कारणों से प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

ऐसे किसानों को पर्याप्त समय देने और उन्हें न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। पुरंदर तहसील के सात गांवों में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए कुल 1,216 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसके लिए 7 मई से किसानों से सहमति पत्र और शपथ पत्र लेने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

अगले चरण की प्रक्रिया में अब आएगी तेजी

किसानों की विभिन्न समस्याओं तथा दस्तावेजी औपचारिकताओं को देखते हुए प्रशासन पहले ही तीन बार अंतिम तिथि बढ़ा चुका है। अब चौथी बार इसकी समय-सीमा बढ़ाकर 16 अगस्त निर्धारित की गई है।

जिलाधिकारी जितेंद्र डूडी ने बताया कि कुल 1,216 हेक्टेयर में से 1,125 हेक्टेयर, यानी लगभग 92.5 प्रतिशत भूमि के लिए किसानों की सहमति प्राप्त हो चुकी है।

इससे संबंधित भूमि शीघ्र ही पुणे जिला प्रशासन के कब्जे में आ जाएगी और परियोजना के अगले चरण की प्रक्रिया तेज हो सकेगी। उन्होंने बताया कि सहमति देने वाले किसानों में से 630 हेक्टेयर भूमि के मालिकों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि जमा कर दी गई है।

अब तक लगभग 52 प्रतिशत किसानों ने मुआवजा स्वीकार कर लिया है। जिला प्रशासन अब तक 2,600 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित कर चुका है।

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जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं

प्रशासन का कहना है कि जिन किसानों ने अभी तक सहमति नहीं दी है, उनमें अधिकांश परियोजना के पक्ष में हैं, हालांकि कुछ मामलों में पारिवारिक विवाद, उत्तराधिकार संबंधी प्रक्रियाएं तथा अन्य व्यक्तिगत कारणों से आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा नहीं हो सके है।

प्रशासन को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में ये मामले सुलझ जाएंगे। इसी कारण जल्दबाजी करने के बजाय किसानों को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है।

जिलाधिकारी जितेंद्र डूडी ने बाताया की राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए अब तक 3,150 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इनमें से अधिकांश राशि किसानों को वितरित की जा चुकी है। 500 करोड़ रुपये का फंड शेष है। इसी राशि से शेष पात्र किसानों को समय पर मुआवजा दिया जाएगा।

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