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Pune Riverfront Project पर जांच के आदेश, कचरा प्रबंधन विभाग का ऐतिहासिक बंटवारा

Pune Riverfront Project Probe: पुणे में मुला-मुठा रिवरफ्रंट परियोजना पर पर्यावरणीय जांच के आदेश दिए गए हैं, वहीं शहर की कचरा समस्या से निपटने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन विभाग को दो हिस्सों में बांटा गया

  • Written By: अपूर्वा नायक
Updated On: Apr 26, 2026 | 09:02 AM

पुणे रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )

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Pune Riverfront Project Environmental Probe : पुणे शहर की दो महत्वपूर्ण प्रशासनिक और पर्यावरणीय गतिविधियों को लेकर राज्य सरकार और महानगरपालिका प्रशासन ने बड़े कदम उठाए हैं।

एक ओर जहां बहुचर्चित ‘नदी तट सुधार’ (मुला-मुठा रिवरफ्रंट डेवलपमेंट) परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने जांच के कड़े आदेश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की बढ़ती कचरा समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोसकचरा प्रबंधन विभाग का ऐतिहासिक विभाजन कर दिया गया है।

पुणे की मुला-मुठा नदी तट सुधार परियोजना को लेकर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की शिकायतों पर राज्य सरकार ने अब गंभीर रुख अपनाया है। सरकार ने इस मामले में विस्तृत जांच के आदेश देते हुए पुणे महानगरपालिका, जल संसाधन विभाग और महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से तत्काल रिपोर्ट मांगी है।

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विशेष रूप से यह निर्देश दिया गया है कि जांच प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता को भी शामिल किया जाए। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना को नवंबर 2024 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मंजूरी देते समय कुछ अनिवार्य शर्तें रखी गई थीं, जिसमें जल संसाधन विभाग के 2018 के सर्कुलर का पालन करना शामिल था। इस नियम के अनुसार, नदी के पात्र की चौड़ाई या उसके प्रवाह क्षेत्र में कोई भी बदलाव करना वर्जित है।

बाढ़ वहन करने की क्षमता घटने की बनी आशंका

पर्यावरण कार्यकर्ता सारंग यादवाडकर ने गंभीर आरोप लगाया है कि लगभग 44 किलोमीटर की लंबाई में नदी की चौड़ाई कम की जा रही है, जिससे नदी की बाढ़ वहन करने की क्षमता बड़े पैमाने पर घट सकती है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि परियोजना का प्रारूप तैयार करते समय संभावित बाढ़ के आंकड़ों को कम करके आंका गया है।

महाराष्ट्र इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (MERI) के आंकड़ों और परियोजना रिपोर्ट के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया है। इसी पृष्ठभूमि में 6 मार्च 2026 को पर्यावरण मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए अब अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। लेकिन मनपा के परियोजना विभाग प्रमुख दिनकर गोजारे का कहना है कि काम पूरी तरह से अदालत के निर्देशों और पर्यावरणीय मानदंडों के भीतर रहकर किया जा रहा है।

शहर की स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर

  • प्रशासनिक मोर्चे पर, पुणे महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम ने शहर की स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन विभाग को दो स्वतंत्र हिस्सों में विभाजित करने का आदेश जारी किया है।
  • अब कचरा संकलन और कचरा प्रसंस्करण के लिए अलग-अलग विभागों का गठन किया गया है और प्रत्येक विभाग की जिम्मेदारी एक स्वतंत्र उपायुक्त को सौंपी गई है। प्रशासनिक कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए कई अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में भी फेरबदल किया गया है।

बदलावों का उद्देश्य सभी की जवाबदेही

नए आदेशों के अनुसार, उपायुक्त संतोष वारुले को अब ठोस कचरा संकलन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, उपायुक्त प्रसाद काटकर अपने वर्तमान प्रभारों के साथ अब कचरा प्रसंस्करण विभाग का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे। इसके अलावा, अविनाश सकपाल को अब जोन क्रमांक 2 और पिछड़ा वर्ग विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का उद्देश्य कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय करना और कार्यक्षमता को बढ़ाना है। संबंधित अधिकारियों को तत्काल अपना नया प्रभार संभालने और प्रशासनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इन दोनों ही घटनाक्रमों पर पर्यावरण प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं।

Pune riverfront probe solid waste management division

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Published On: Apr 26, 2026 | 09:02 AM

Topics:  

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